क्षेत्रीयता के आगे सिमट गए राष्ट्रीय मुद्दे: ममता पर हमले बंगाली अस्मिता से जुड़े, इससे भाजपा को नुकसान हुआ

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पश्चिम बंगाल15 मिनट पहलेलेखक: मधुरेश और अमरेंद्र कुमार

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पश्चिम बंगाल में जीत का जश्न मनाते टीएमसी के समर्थक। - Dainik Bhaskar

पश्चिम बंगाल में जीत का जश्न मनाते टीएमसी के समर्थक।

भाजपाई, नंदीग्राम में ममता बनर्जी की हार में खुशियां भले तलाशें, पर बंगाल ने ‘अपनी बेटी’ की पार्टी को तीसरी बार कुर्सी पर बिठाने का खेला कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी बहुत मजबूत टीम की यह इच्छा पूरी नहीं हुई-‘2 मई दीदी गई।’ बेशक, ममता हारीं मगर उनकी पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला। भाजपा का ‘असोल परिवर्तन’ इस मायने में जरूर हुआ कि कम्युनिस्ट-कांग्रेस का सफाया करके वह विपक्ष के रूप में खड़ी हो गई। यह एकछत्र राज के मिजाज वाले बंगाल में राजनीतिक बदलाव की मुनादी है।

यह गलाकाट राजनीति, संघीय व्यवस्था के भीषण टकराव के रूप में खुलेआम होगा। तृणमूल के पाले से देखें तो ममता के खिलाफ भाजपा का हर दांव उल्टा पड़ा। इसकी गवाही है ‘अबकी बार 200 पार’ नारा भाजपा का लेकिन गया तृणमूल के खाते में। भाजपा के हर हमले का फायदा, सहानुभूति के रूप में ममता को मिला। लोगों ने उनका मजाक उड़ाने को संजीदगी से लिया।

भाजपा भले ही 79 तक पहुंच गई, फिर भी यह उसके लिए निराशाजनक ही रहा। पार्टी 2019 लोकसभा चुनाव से काफी पीछे रह गई। लोकसभा चुनाव के हिसाब से पार्टी को 294 में से 121 विधानसभा सीटों पर बढ़त थी। इसके बावजूद पार्टी अपने दावे के आसपास भी नहीं पहुंच सकी।

भाजपा ने एक साल में बड़ी तादाद में टीएमसी और लेफ्ट फ्रंट के नेताओं को तोड़ा और 142 से अधिक दल-बदलुओं को टिकट दिया, लेकिन ये नेता पुरानी पार्टी का वोट साथ नहीं ला सके। चुनाव पीएम नरेंद्र मोदी बनाम सीएम ममता बनर्जी बन गया था। ममता के आक्रामक होने से कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट का वोटबैंक लोकसभा चुनाव की तरह भाजपा में शिफ्ट नहीं हुआ।

ध्रुवीकरण की कोशिश कामयाब न हो सकी
ममता के कथित मुस्लिम तुष्टिकरण की बुनियाद पर भाजपा के हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की कोशिश कामयाब नहीं हुई। यह भाजपाई प्रयास तृणमूल के लिए फायदेमंद रहा। ममता अपनों को ‘मीरजाफर’ (द्रोही/धोखेबाज) की पहचान कराने में सफल रहीं। असदुद्दीन ओवैसी और कम्युनिस्ट-कांग्रेस-इंडियन सेक्युलर फ्रंट का हश्र सामने है।

ममता ने ‘चंडी पाठ’ कर भाजपा के ‘जय श्रीराम’ को किनारे कर दिया। ममता लगातार कहती रहीं कि बिहार, यूपी और गुजरात के गुंडों को लाकर बंगाल पर कब्जे की तैयारी है। ममता, भाजपा की पूरी फौज के सामने अकेले टिकीं रहीं। चुनाव के दिन कूचबिहार की फायरिंग को भी उन्होंने खूब भुनाया।

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