कैप्टन अमरिंदर सिंह को तगड़ा झटका: पंजाब विस चुनाव 2022 से ठीक पहले प्रशांत किशोर ने किया संन्यास का ऐलान; 1 रुपए वेतन लेकर बने थे सलाहकार, शुरू से ही विपक्ष के निशाने पर थे

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चंडीगढ़13 मिनट पहले

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प्रशांत किशोर ने कई पार्टियों के साथ चुनाव के दौरान काम किया है और उनको सफलता की बुलंदियों पर पहुंचाया है। - Dainik Bhaskar

प्रशांत किशोर ने कई पार्टियों के साथ चुनाव के दौरान काम किया है और उनको सफलता की बुलंदियों पर पहुंचाया है।

  • ऐसे समय में ‘संन्यास’ की घोषणा की जब पंजाब में कांग्रेस बेअदबी कांड को लेकर उलझन में फंसी हुई है

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर से ‘दीदी’ ममता बनर्जी की सरकार बनने के बाद उनके सलाहकार प्रशांत किशोर की चर्चा हर तरफ हो रही है। क्योंकि प्रशांत किशोर ने संन्यास का ऐलान कर दिया है। प्रशांत किशोर ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे अब किसी भी पार्टी के लिए रणनीति नहीं बनाएंगे। उनकी टीम यह काम संभालेगी। इस घोषणा से सियासत में हड़कंप मच गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए यह घोषणा एक तगड़ा झटका है। क्योंकि उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 के लिए प्रशांत किशोर को अपना राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया हुआ है।

बता दें कि साल 2022 में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। जोड़-तोड़ की राजनीति जारी है। इसी के मद्देनजर पंजाब का जीतने के लिए कांग्रेस ने प्रशांत किशोर को रणनीतिकार के तौर पर नियुक्त किया। प्रशांत दो महीने पहले ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रधान सलाहकार बने। लेकिन प्रशांत ने ऐसे समय में ‘संन्यास’ की घोषणा कर दी है, जब पंजाब में कांग्रेस बेअदबी कांड को लेकर उलझन में फंसी हुई है। चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है और इस घड़ी में प्रशांत किशोर का संन्यास के ऐलान ने कांग्रेस की 2022 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को जोरदार झटका दिया है।

प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी तो तमिलनाडु में स्टालिन द्रविड के लिए काम किया था। 2017 में प्रशांत ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए रणनीति तैयार की थी, जिसके बाद पंजाब में कांग्रेस का 10 साल का सत्ता का सूखा खत्म हुआ था। प्रशांत के हुनर का लोहा मानते हुए ही कैप्टन ने उन्हें अपना प्रधान सलाहकार बनाया था। यही नहीं, कैप्टन ने उन्हें कैबिनेट रैंक भी दिया था। इसके बाद कैप्टन और प्रशांत की कई बार आगामी चुनाव को लेकर चर्चाएं हो चुकी है। उन्होंने पंजाब में न सिर्फ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं, बल्कि वह विधायकों से फीडबैक भी ले रहे थे, लेकिन अब कांग्रेस के खेमे में सन्नाटा छा गया है।

क्योंकि कांग्रेस को प्रशांत किशोर से खासी उम्मीदें थी। हालांकि उन्होंने संन्यास के पीछे निजी कारण बताए हैं, लेकिन यह पंजाब में कैप्टन सरकार के लिए बुरी खबर है। वैसे भी प्रशांत किशोर भले ही एक रुपए वेतन पर कैप्टन के प्रधान सलाहकार बने थे, लेकिन वह शुरू से ही विपक्ष के निशाने पर थे। उनके सलाहकार बनने के बाद से ही शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने किसान कर्ज माफी, घर-घर रोजगार, बेरोजगारी भत्ते जैसे मुद्दों पर सवाल पूछने शुरू कर दिए थे।

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