सीसीएमबी लैब में खंगाली जा रही वायरस की कुंडली: म्यूटेंट और जीनोम सीक्वेंस पर बिना ब्रेक काम कर रहे 210 रिसर्चर, रोज 500 आरटीपीसीआर और 50 से ज्यादा जिनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट करते हैं

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हैदराबाद25 मिनट पहलेलेखक: प्रमोद कुमार

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जब सभी लोग वायरस का नाम सुनकर ही डर रहे थे, तब सीसीएमबी ने तेलांगना सरकार के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट के साथ कोविड टेस्टिंग शुरू कर दी थी। - Dainik Bhaskar

जब सभी लोग वायरस का नाम सुनकर ही डर रहे थे, तब सीसीएमबी ने तेलांगना सरकार के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट के साथ कोविड टेस्टिंग शुरू कर दी थी।

केंद्र सरकार के जीनोम सीक्वेंसिंग लैबोरेट्री सेल्युलर और आणविक जीव विज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) हैदराबाद में वैज्ञानिक और रिसर्च स्कॉलर काम में जुटे हुए हैं। रविवार हो या छुट्‌टी का काेई भी दिन, यहां वैज्ञानिक और रिसर्च स्कॉलर कोरोना वायरस की टेस्टिंग, सीक्वेंसिंग, कल्चर, व्यवहार, क्षमता और वैक्सीन रिसर्च समझने में लगातार जुटे हुए हैं।

पिछले 13 महीने से यहां 210 लोग बिना ब्रेक लिए यह काम कर रहे हैं, इनमें 60 वैज्ञानिक और 150 पीएचडी स्कॉलर हैं। सीसीएमबी के साइंटिस्ट के लिए वायरस दोस्त है। डॉ. पूरन सिंह सिजवाली और डॉ तेज सौपाटी कहते हैं कि वायरस हैं तो हम हैं। सफल वायरस वही है जो तेजी से पनपे और फैले। सफल साइंटिस्ट वही है जो इसका व्यवहार समझे और वायरस को मानव स्वास्थ्य के अनुकूल बना दे।

देश में सीसीएमबी ने ही सबसे पहले वायरस कल्चर डेवलप किया। जब कोरोना पूरे देश में तबाही ला रहा है भास्कर ने हैदराबाद की इस लैब में पहुंचकर देखा, हमारे वैज्ञानिक कैसे वो कवच बनाने की रिसर्च कर रहे हैं जो हमारी रक्षा करने में समर्थ हो…

देश के हर एयरपोर्ट से इस सीसीएमबी लैब में आता है सैंपल

  • नए ड्राई स्वाइप मैथड से टेस्टिंग तीन गुना बढ़ेगी, लागत आधी होगी।
  • देशभर में बन रही टेस्टिंग किट का परिक्षण कर वेलीडेट करते हैं।
  • कोरोना दवा का फार्मूला परखते हैं। 100 से ज्यादा टेस्टिंग में हैं।
  • कम्युनिटी सैंपलिंग कर बता रहे हैं कहां कितने लोग इंफेक्टेड हैं।
  • वायरस बनाकर कल्चर बना रहे हैं, ताकि देश में रिसर्च हो सके।

आईडिया आए तो मशीन चलाने की खुली छूट

सीसीएमबी डायरेक्टर राकेश मिश्रा बताते हैं रात 2 बजे भी आइडिया आए तो रिसर्चर को करोड़ों की मशीन चलाने के लिए किसी की इजाजत नहीं लेनी होती। आरटीपीसीआर टेस्ट का नया मैथड ऐसे ही विकसित हुआ। डबल-ट्रिपल म्यूटेंट पर काम कर लैब में परीक्षण के लिए वायरस बना रहे हैं और ज्यादा प्रभावी टीका बनाने और वायरस को निष्प्रभावी करने की दिशा में काम चल रहा है। रोज 500 से ज्यादा आरटीपीसीआर, 50 से ज्यादा जिनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट करते हैं।

रिसर्च इस बात की होती है कि लड़ना किससे है

मिश्रा कहते हैं कि रिसर्च इसी बात की होती है कि हमें लड़ना किससे है। हमारे पास एयरपोर्ट का हर सैम्पल आता है। इससे हम जिनोम सीक्वेंसिंग कर वायरस की कुंडली निकाल लेते हैं। हमने शुरू में ही बताया था कि ए3आई वैरियंट मलेशिया से आया। हमने यह भी बताया था कि इसकी प्रसार क्षमता ज्यादा नहीं। तब पूरी दुनिया में यह वैरियंट था। वहीं, यूके वैरियंट सबसे पहले पंजाब आया। देश के सभी एयरपोर्ट के डाटा से हमने यह सिक्वेंस किया।

सीक्वेंसिंग में 10 दिन तक का समय लगता है

सीसीएमबी के मेडिकल जेनेटेसिस साइंटिस्ट डॉ. कार्तिक भारद्वाज बताते हैं कि एक सैम्पल की सीक्वेंसिंग में 10 से 15 दिन तक का समय लग सकता है। पहले दो घंटे में सैम्पल का आरएनए, फिर दो घंटे में आरएनए को डीएनए में कन्वर्ट करते हैं। इसके बाद डीएनए एम्पलीफाई करने में छह घंटे और सीक्वेंसिंग देने में छह घंटे लगते हैं। सीक्वेंसिंग के बाद डेटा एनालसिस में दो दिन लगते हैं। इसके बाद 10 से 12 दिन तक इसके वैरिएंट के असर पर काम करते हैं।

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