सिर्फ 15% मरीजों काे ही अस्पताल जाने की जरूरत: डब्ल्यूएचओ ने कहा बड़े आयोजन, कम टीके और ज्यादा संक्रामक वैरिएंट के कारण भारत में दूसरी लहर घातक

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जिनेवा4 घंटे पहले

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अमेरिकी राष्ट्रपति के चीफ मेडिकल एडवाइजर डॉ एंथनी फाउची ने कहा है कि दुनिया के तमाम देश भारत को कोरोना की इस भयावह त्रासदी से बचाने में नाकाम रहे। - Dainik Bhaskar

अमेरिकी राष्ट्रपति के चीफ मेडिकल एडवाइजर डॉ एंथनी फाउची ने कहा है कि दुनिया के तमाम देश भारत को कोरोना की इस भयावह त्रासदी से बचाने में नाकाम रहे।

डब्लूएचओ ने कहा है कि भारत में कोरोना की भयावह लहर के लिए वायरस के एक म्यूटेशन को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं। इसके पीछे कई कारण हैं। पहली लहर थमने के बाद शुरू हुए भारी भीड़ वाले आयोजन, ज्यादा संक्रामक वैरिएंट और वैक्सीनेशन की धीमी रफ्तार ने भारत में कोरोना को बेकाबू कर दिया। डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता तारिक जसारेवीव ने कहा, भारत में आई इस सुनामी के लिए बहुत हद तक कोरोना से लड़ने के लिए जरूरी व्यवहार का पालन न करना भी वजह है। दहशत के चलते अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है। संक्रमण से ग्रस्त केवल 15% लोगों को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है।

इनमें से भी बहुत कम को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। फिलहाल, समस्या ये है कि लोग अपनों को लेकर तेजी से अस्पताल भाग रहे हैं, क्योंकि उन्हें सही सूचना नहीं मिल रही। 85% मामलों में घर पर कोरोना का इलाज हो सकता है। लोगों को सुरक्षित होम केयर के बारे में जानकारी देनी चाहिए। वहीं, डब्लूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडहॉनम घेब्रयासिस ने कहा, हेल्थ सुविधाओं की कमी झेल रहे भारत को 4,000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेज रहे हैं।

भारत को त्रासदी से बचाने में नाकाम रही दुनिया: अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति के चीफ मेडिकल एडवाइजर डॉ एंथनी फाउची ने कहा है कि दुनिया के तमाम देश भारत को कोरोना की इस भयावह त्रासदी से बचाने में नाकाम रहे। अमीर देश दूसरे जरूरतमंद देशों को जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की न्यायसंगत उपलब्धता सुनिश्चित करने में फेल रहे हैं। भारत के मौजूदा हालात इसी वैश्विक असमानता को उजागर करते हैं।

उन्होंने कहा, वैश्विक महामारी से निपटने के लिए वैश्विक एकता जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। डब्ल्यूएचओ कोवैक्स इनीशिएटिव के तहत भारत की मदद तेज करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि इससे अधिक करने की जरूरत है। मुझे लगता है कि यह ऐसी जिम्मेदारी है जो संपन्न देशों को निभानी चाहिए। अमेरिका भी मदद बढ़ा रहा है। हम ऑक्सीजन, रेमडेसिविर, पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्वीपमेंट सुविधाएं भेज रहे हैं। जल्द ही वैक्सीन भी भेजेंगे।

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