अभिव्यक्ति की आजादी: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला छात्रा के पक्ष में, कहा- कैंपस से बाहर कही बातों को स्कूल नियंत्रित नहीं कर सकते

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वॉशिंगटन6 घंटे पहले

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ब्रैंडी लेवी जिसने सोशल मीडिया पर पोस्ट में अपशब्द लिखे थे जिसे लेकर स्कूल से सस्पेंड किया गया, अब यह मामला कोर्ट पहुंच गया। - Dainik Bhaskar

ब्रैंडी लेवी जिसने सोशल मीडिया पर पोस्ट में अपशब्द लिखे थे जिसे लेकर स्कूल से सस्पेंड किया गया, अब यह मामला कोर्ट पहुंच गया।

जब 2017 में पेंसिल्वेनिया की 14 साल की ब्रैंडी लेवी को सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर स्कूल से सस्पेंड किया गया था, तब किसी ने सोचा नहीं होगा कि यह मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा। पर इस हफ्ते ऐसा हुआ। दशकों में यह पहला मामला है जब सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली छात्रों की अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार पर बात की।

दरअसल मेहेनोय एरिया हाई स्कूल में नौवीं की छात्रा ब्रैंडी ने मई 2017 में ब्रैंडी ने खुद को चीयरलीडर टीम में शामिल न किए जाने पर एक पोस्ट में अपशब्द लिखे थे और उसकी एक सहपाठी ने मिडिल फिंगर दिखाते हुए फोटो भेजकर नाराजगी जाहिर की थी। स्कूल के कोच ने नियम तोड़ने का हवाला देते हुए ब्रैंडी को एक साल के लिए स्कूल से बाहर कर दिया। ब्रैंडी के माता-पिता ने संघीय कोर्ट में स्कूल के खिलाफ केस दायर किया। साथ ही अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन (जो मुक्त अभिव्यक्ति की रक्षा करता है) के तहत ब्रैंडी को टीम में बहाल करने की मांग की।

इस मामले में जज ने ब्रैंडी को बहाल करने का फैसला दिया। जज ने टिप्पणी में कहा कि छात्रा ने ऐसा कोई काम नहीं किया था कि उसे इतनी बड़ी सजा दी जाए। कोर्ट ने 1969 के एक मामले का जिक्र किया और कहा कि स्कूल के कैंपस के बाहर की गई बातों को स्कूल रेगुलेट नहीं कर सकते। फैसले के बाद ब्रैंडी ने कहा कि मैं अपनी बात रखने से नहीं डरती। इसके लिए सजा भी नहीं दी जानी चाहिए। मैंन किसी को टारगेट करके कुछ नहीं कहा था। न ही यह बदमाशी या उत्पीड़न जैसा कुछ था।

14 साल का कोई भी बच्चा ऐसी ही प्रतिक्रिया देता: ब्रैंडी

18 साल की ब्रैंडी ने कोर्ट में तर्क दिया कि उसने यह पोस्ट स्कूल से बाहर और छुट्‌टी के दिन की थी। इसलिए स्कूल सजा नहीं दे सकता। उसने कहा कि मैं उस वक्त परेशान थी, 14 साल का कोई भी बच्चा उस वक्त ऐसी ही प्रतिक्रिया देता, जैसी मैंने दी थी।

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