कोविड प्रोटोकॉल: हल्का सर्दी-जुकाम होने पर घबराइए नहीं; कोरोना गाइड से जानें कब घर पर रहना है और किन स्थितियों में अस्पताल जाना जरूरी

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4 घंटे पहले

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  • घर पर आइसोलेट या अस्पताल में बिना ऑक्सीजन बेड के भर्ती मरीजों को रेमडेसिविर न दी जाए

कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ऐसे में अस्पतालों पर बोझ भी बढ़ गया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना होने के बाद सीधे अस्पताल दौड़ने के बजाए संक्रमितों को पहले अपनी स्थिति को देखना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि करीब 95% कोरोना मरीज घर पर ही ठीक हो जाते हैं।

ऐसे समय जब अस्पतालों में बेड, आईसीयू, ऑक्सीजन की कमी हो रही है तब साधारण कोरोना की स्थिति में मरीजों को अस्पताल में भर्ती नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से जरूरतमंद मरीजों को अस्पताल में जरूरी सुविधाएं मिल सकेंगी। हालांकि, कोरोना संक्रमित होने के बाद डॉक्टर से संपर्क जरूर करें क्योंकि अलग-अलग मरीजों पर यह अलग-अलग तरह से असर करता है। डॉक्टर की सलाह को गंभीरता से मानें-

अगर हल्के लक्षण हों तो घर पर ऐसे आइसोलेशन में रहे

  • बुखार ज्यादा तेज न हो, हल्के लक्षण हों।
  • फिजिकल डिस्टेंसिंग रखें, घर में मास्क पहन कर रखें, हाथों को साफ करते रहें।
  • सेंप्टोमेटिक मेनेजमेंट पर ध्यान दें। आवश्यक दवाएं जैसे- बुखार के लिए, मल्टीविटामिन लें, हाइड्रेट होते रहें।
  • अपने फिजिशियन के संपर्क में रहें।
  • शरीर का तापमान-ऑक्सीजन चेक करते रहें।
  • अगर पांच दिन से अधिक समय तक सांस लेने में परेशानी हो रही हो, तेज बुखार हो, सीवियर कफ हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।

ऑक्सीजन 93 के नीचे हो, तब ही अस्पताल में जाना जरूरी

  • जब प्रति मिनट सांस लेने की रफ्तार 24 और ऑक्सीजन का स्तर 90-93 हो।
  • ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जाए। चेस्ट टेस्ट करवाएं।
  • नॉन रिब्रिदिंग फेस मास्क का इस्तेमाल हो। वक्त-वक्त पर ऑक्सीजन थेरेपी दी जाए। जरूरत पड़ने पर लंग्स का एचआरसीटी और अन्य टेस्ट करवाए ।
  • अस्पताल में भर्ती मरीज की हालत गंभीर है, तो उसे रेमडेसिविर दी जाए। घर पर आइसोलेट या अस्पताल में बिना ऑक्सीजन बेड के भर्ती मरीजों को रेमडेसिविर ना दी जाए।

आईसीयू तब ही जरूरी, जब ऑक्सीजन 90 के नीचे हो

  • सांस लेने की दर प्रति मिनट 30 से अधिक हो। ऑक्सीजन लेवल 90 से कम हो जाए।
  • 60 वर्ष से अधिक के लोग, तनाव, कार्डियोवस्कुलर डिजीज, डायबिटीज, लंग/किडनी/लीवर की बीमारी, सेरेब्रोवस्कुलर डिजीज या मोटापे से ग्रसित गंभीर संक्रिमितों के लिए यह ज्यादा जरूरी है।
  • वेंटिलेटर का इस्तेमाल प्रोटोकॉल के तहत किया जाए। मरीज की गंभीर स्थिति में इसका इस्तेमाल हो। रिपोर्ट कोरोना निगेटिव और बाकी सारी जांचे सही पाए जाने पर उसे डिस्चार्ज किया जाए।

इन 4 बातों का ध्यान हमें रखना है

  • कोविड मरीज ऑक्सीजन लेवल मॉनिटर करते रहें। 93 से कम होने पर हॉस्पिटल जाएं।
  • सभी मरीजों को रेमडेसिविर, प्लाज्मा, इवरमेक्टिन, ब्लड थिनर्स जैसी चीजों की जरूरत नहीं है।
  • बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर और आईसीयू उन मरीजों के लिए हैं जो कोविड के गंभीर मरीज हैं।
  • वैक्सीन लगवाने पर जोर दें। ज्यादा लोगों का टीकाकरण होगा अस्पताल पर बोझ कम होगा।

इन 4 पर सरकार काम करे

  • जिनका इलाज घर पर हो सकता है उन्हें भर्ती न करें। सरकार एडमिशन नियम सख्त बनाए।
  • वार्ड लेवल पर प्रचार करना होगा कि किन लक्षणों के मरीज घर पर रहें, कौन से मरीज अस्पताल जाएं।
  • लोगों को बताएं कि पॉजिटिव आने पर इलाज करवाएं। बार-बार टेस्ट करवाकर भीड़ न बढ़ाएं।
  • टेस्टिंग, इंजेक्शन, ऑक्सीजन के लिए मरीजों के परिजन लाइनों में लग रहे हैं। इस भीड़ को कम करें।

सोर्स; केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय व स्वास्थ्य विशेषज्ञ

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