महामारी विशेषज्ञ बोले: कोरोना की दूसरी लहर तो आनी ही थी, हम ही तैयारियों में पीछे रह गए; अगर आज सख्ती के साथ इसे रोकेंगे तब महीनेभर में असर दिखेगा

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भोपाल33 मिनट पहले

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डॉ. चंद्रकांत लहारिया ने कहा- 1918 में स्पैनिश फ्लू महामारी में भी दूसरी-तीसरी लहर ज्यादा जानलेवा रही थी - Dainik Bhaskar

डॉ. चंद्रकांत लहारिया ने कहा- 1918 में स्पैनिश फ्लू महामारी में भी दूसरी-तीसरी लहर ज्यादा जानलेवा रही थी

कोरोना की भयावह होती दूसरी लहर ने सारे रिकॉर्ड तोड़ने शुरू कर दिए हैं। देश में पहली बार 24 घंटे में साढ़े तीन लाख से ज्यादा नए केस सामने आ रहे हैं। यह दुनिया में किसी भी लहर में किसी भी देश में आए केस के लिहाज से सबसे ज्यादा है। अमेरिका और ब्राजील को पीछे छोड़कर हम नए केस के मामले में दुनिया में सबसे आगे हो गए हैं।

एक्टिव केस भी बढ़ते जा रहे हैं। दूसरी लहर क्यों आई? यह कैसे थमेगी? इससे जुड़े प्रश्नों को लेकर भास्कर ने देश के जाने-माने पब्लिक हेल्थ पॉलिसी एक्सपर्ट और महामारी विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहारिया से बातचीत की। आइए, उनके ही शब्दों में समझते हैं कि दूसरी लहर क्या है और क्यों यह इतनी घातक होती जा रही है…

भास्कर Q&A } जनवरी में हुए सर्वे में 10% लोगों में ही एंटीबाॅडी मिली, 90% को संक्रमण का खतरा था

कोरोना की सेकंड वेव इतनी तेज़ और इतनी घातक होने के कारण क्या हैं?
दूसरी लहर को समझने के लिए हमें महामारी विज्ञान को समझना होगा। महामारी मेंं एक से ज्यादा लहर आना सामान्य बात है। हमने यह 1918 में स्पैनिश फ्लू के समय भी देखा। उस समय भी हमारे यहां दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक थी।

कोविड-19 को लेकर अलग-अलग देशों में भी हमने यही देखा है। लहर को लेकर हम महामारी विज्ञान में तीन बातों को देखते हैं- एजेंट (वायरस), होस्ट (इंसान) और एनवायरनमेंट (पर्यावरण या परिवेश)। इसी पर यह लहर तय होती है। इसे हम बारी-बारी से समझते हैं…

1. एजेंट यानी वायरस। विदेशों में हमने कोरोनावायरस के डबल म्यूटेंट और अब तो ट्रिपल म्यूटेंट वैरिएंट भी देखा है। भारत में बड़े पैमाने पर वायरस की जीनोम स्टडी नहीं हुई है, पर फिर भी हम इसे दूसरी लहर का आधार मान सकते हैं। अब वायरस ज्यादा संक्रामक हो चुका है। शरीर में पहले से बनी इम्युनिटी को भी चकमा देने में कामयाब हो रहा है।

2. होस्ट यानी इंसानों की। पहली लहर के समय लोग ज्यादा सावधान थे। घरों में ही कैद थे। उनके व्यवहार में बड़ा बदलाव आया है। नतीजे भी बदले हैं। मुंबई में पहली लहर में संक्रमण झुग्गी-बस्तियों के मुकाबले ऊंचे तबके में बराबरी से था। इस बार ज्यादातर केस हाईराइज से आए हैं। साफ है कि लोगों ने मान लिया था कि वायरस खत्म हो गया है और उनकी लापरवाही ही उन पर भारी पड़ी है। जनवरी में नेशनल सर्वे किया तो नतीजे मिले कि 10% लोगों में ही एंटीबॉडी हैं। यानी 90% लोग ऐसे थे, जिन्हें कोरोना का खतरा था। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने से लोग प्रभावित हुए।

3.सरकार कहती रही कि प्रोटोकॉल का पालन करें। पर जो बोल रहे थे, उन्होंने ही पालन नहीं किया। कथनी और करनी में अंतर से लोगों का भी भरोसा टूटा। कुंभ मेला या चुनावी रैलियों में हमने यह देखा भी। महामारी में इन तीनों फेक्टरों का आपसी संबंध लहर तय करता है। कई देशों में पिछले साल ही दो-तीन लहर आ चुकी थी, तब हम सोचने लगे थे कि महामारी जा चुकी है। यह हमारी चूक थी। उस समय प्रयास होते तो दूसरी लहर के प्रभाव को कम किया जा सकता था। दूसरी लहर तो निश्चित थी।

4.सेकंड वेव का यह दौर कब तक रहेगा और यह उतरेगा कैसे?
आज जो हम केस देख रहे हैं, वह 14 दिन पुराने केस का नतीजा है। इस दौरान वायरस शरीर में जाकर इनक्युबेशन में रहा। होली या चुनावी रैलियों में बड़े इवेंट्स हुए और इसके बाद ही संक्रमण फैला। यह कहना बेहद मुश्किल है कि पीक कब आएगा। यह इस बात से तय होगा कि लोगों का व्यवहार क्या और कैसा रहता है।

बढ़े हुए इन्फेक्शन को देखते हुए कि 4 से 6 हफ्ते में गिरावट दिख सकती है। यह भी देखना होगा कि क्या संक्रमण नए क्षेत्र में फैल रहा है। पीक आने के बाद नंबर गिरने लगेंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि फरवरी की तरह एकाएक 10 हजार केस तक पहुंच जाएंगे। 6 हफ्ते में लोगों का व्यवहार तय करेगा कि वायरस क्या असर दिखाता है।

5.इससे बचने के तरीके क्या हैं?
अच्छी बात यह है कि वायरस अब एक साल पुराना हो गया है। एक साल पहले के मुकाबले हम अब बहुत कुछ जानकारी रखते हैं। इससे बचने के लिए 5 बुनियादी बातों पर फोकस करना होगा…
पिछली लहर के मुकाबले इस बार वायरस ज्यादा ताकतवर हो गया है। एक सदस्य को इंफेक्शन होता है तो अन्य परिजनों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए बताए गए व्यवहार का पालन करें। हाथों को धोएं, मास्क पहनें और बाहर निकलने पर दो गज दूरी रखें।

आपके इलाके में लॉकडाउन लगा हो या न लगा हो, बाहरी गतिविधियां सीमित रखें। कोशिश करें भीड़ से अलग रहें। कोई भी लक्षण आने पर जांच कराएं। जांच जितनी जल्द होगी, वायरस को उतनी जल्द खत्म कर सकेंगे। इस दौरान खुद को आइसोलेट कर लें। इससे परिजनों तक वायरस नहीं पहुंचेगा।

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