ऑस्ट्रेलियाई संसद में पहुंचा ‘मीटू’ अभियान: महिलाएं बोलीं- देश की संसद सबसे असुरक्षित कार्यस्थल; पुरुष नेताओं ने हमारे बारे में नहीं सोचा; जूनियर कर्मियों को खिलौना समझा

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6 घंटे पहलेलेखक: डेमियन केव

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लॉ और बिजनेस में सफल करियर के बाद जूलिया बैंक्स 5 साल पहले जब ऑस्ट्रेलिया की संसद पहुंची तो वहां का माहौल देखकर लगा कि उन्हें 80 के दशक में धकेल दिया गया है। वहां शराब बह रही थी। पुरुष नेताओं से इसकी गंध भी आती थी। बैंक्स बताती हैं कि ऑस्ट्रेलिया के नेताओं ने महिलाओं के बारे में कभी नहीं सोचा।

उन्होंने जूनियर कर्मियों को खिलौनों की तरह देखा। एक बार एक नेता ने जूनियर का परिचय कराते वक्त अपना हाथ उसकी पीठ पर रगड़ दिया। उस लड़की से मेरी आंखे मिलीं। पर बिन कुछ कहे ही मैंने उसकी बात समझ ली, कि चुप रहिए वरना मैं नौकरी से हाथ धो बैठूंगी। ऑस्ट्रेलिया की संसद महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित कार्यस्थल है।

देर से ही सही पर ऑस्ट्रेलियाई संसद में ‘मीटू’ अभियान पहुंच गया है। ब्रिटनी हिंगिस ने अपने साथ हुए दुष्कर्म के मामले को उजागर कर भूचाल ला दिया है। इसके बाद हजारों महिलाएं अपनी कहानियां साझा कर रही हैं। जस्टिस मार्च निकालकर बदलाव की मांग कर रही हैं। इसे लेकर पीएम स्कॉट मॉरिसन के नेतृत्व वाला कंजर्वेटिव गठबंधन ऐतिहासिक विरोध का सामना कर रहा है।

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