क्या ऑपरेशनल फेल्योर है नक्सली हमला: 20 दिन पहले से थी नक्सलियों की मौजूदगी की जानकारी, बड़े अफसर भी मौजूद फिर भी इतना बड़ा हमला हो गया

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रायपुर3 मिनट पहले

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बस्तर के बीजापुर में शनिवार को नक्सलियों के हमले में 22 जवानों के शहीद होने की खबर है। नक्सलियों ने 700 जवानों को घेरकर हमला किया था। - Dainik Bhaskar

बस्तर के बीजापुर में शनिवार को नक्सलियों के हमले में 22 जवानों के शहीद होने की खबर है। नक्सलियों ने 700 जवानों को घेरकर हमला किया था।

बीजापुर में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में 24 जवानों की शहादत ऑपरेशनल प्लानिंग की नाकामी की ओर इशारा कर रही है। 700 जवानों को घेरकर नक्सलियों ने 3 घंटे गोलियां चलाईं। 24 घंटे बाद जवानों के शव लेने के लिए रेस्क्यू टीम नहीं पहुंची। ये सब तब हुआ, जब 20 दिन पहले से ही इस इलाके में नक्सलियों की बड़ी तादाद में मौजूदगी की जानकारी मिल गई थी।

जिस इलाके में मुठभेड़ हुई है, वह नक्सलियों की फर्स्ट बटालियन का कार्यक्षेत्र है। 20 दिन पहले UAV की तस्वीरों के जरिए पता चला था कि यहां बड़ी संख्या में नक्सली मौजूद हैं।

ऑपरेशनल प्लानिंग पर सवाल
CRPF के एडीडीपी ऑपरेशंस जुल्फिकार हंसमुख, केंद्र के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार व CRPF के पूर्व डीजीपी के विजय कुमार और मौजूदा आईजी ऑपरेशंस पिछले 20 दिनों से जगदलपुर, रायपुर व बीजापुर के क्षेत्रों खुद मौजूद हैं। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में जवानों का शहीद होना पूरी ऑपरेशनल प्लानिंग पर सवाल खड़े कर रहा है।

ये 3 बड़े सवाल उठ रहे

  • -वरिष्ठ अफसरों की लंबे समय तक संबंधित क्षेत्र में मौजूदगी व आवाजाही छुपी नहीं रह सकती। नक्सलियों को भनक लगना पूरी तरह संभव है।
  • – ऑपरेशन में बेस्ट फोर्सेस शामिल थीं। CRPF कोबरा, छत्तीसगढ़ STF, DRG और नई बस्तरिया बटालियन जैसी टीमें मोर्चा संभाल रही थीं। ऐसे में हादसा लोकल नहीं, शीर्ष स्तर पर प्लानिंग की चूक दर्शाता है।
  • – पांच तरह के अलग-अलग बलों की ऐसे ऑपरेशन में मौजूदगी कमांड और कंट्रोल के लिए बड़ी चुनौती है। फायरिंग की सूरत में सभी अपने अपने प्रशिक्षण व बनावट के हिसाब से कार्रवाई करते हैं। यूनिफार्मिटी नहीं रह पाती।

23 मार्च को नक्सली ब्लास्ट में 5 जवान शहीद हुए थे
छत्तीसगढ़ में 10 दिन के अंदर यह दूसरा नक्सली हमला है। इससे पहले 23 मार्च को हुए हमले में भी 5 जवान शहीद हुए थे। यह हमला नक्सलियों ने नारायणपुर में IED ब्लास्ट के जरिए किया था। तर्रेम थाने से CRPF, DRG, जिला पुलिस बल और कोबरा बटालियन के जवान संयुक्त रूप से सर्चिंग पर निकले थे। इसी दौरान दोपहर में सिलगेर के जंगल में घात लगाए नक्सलियों ने हमला कर दिया। इस पर जवानों की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई।

शांति वार्ता प्रस्ताव भेजने के बाद से हमले तेज हुए
नक्सलियों ने 17 मार्च को शांति वार्ता का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा था। नक्सलियों ने विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि वे जनता की भलाई के लिए छत्तीसगढ़ सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने बातचीत के लिए तीन शर्तें भी रखी थीं। इनमें सशस्त्र बलों को हटाने, माओवादी संगठनों पर लगे प्रतिबंध हटाने और जेल में बंद उनके नेताओं की बिना शर्त रिहाई शामिल थीं।

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