ईस्टर पर अंडों का फंडा: अंडे के खोल से ही बनती हैं मुर्गी के चूजे की हड्डियां, 120 किमी की यात्रा के बाद अंडे देता है पेंगुइन; जानिए अंडों से जुड़ीं और भी दिलचस्प बातें

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38 मिनट पहले

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गुड फ्राइडे के दिन प्रभु यीशु को यातनाएं देते हुए सूली पर चढ़ा दिया गया था। इसके दो दिन बाद यानी रविवार को यीशु दोबारा जीवित हो गए थे। इसे ही ईस्टर संडे कहा जाता है। यीशु के दोबारा जीवित होने की खुशी में ईसाई इन दिन को त्योहार के रूप में मनाते हैं।

माना जाता है कि दोबारा जीवित होने के बाद प्रभु यीशु 40 दिनों तक अपने शिष्यों को सत्य के रास्ते पर चलने का संदेश देकर स्वर्ग चले गए।

ईस्टर के सेलिब्रेशन में अंडों की खास जगह है। ईस्टर से एक दिन पहले रात में लोग रंग-बिरंगे सजे हुए अंडों को घरों में छिपा देते हैं, जिन्हें अगली सुबह बच्चे ढूंढते हैं। वहीं, ईस्टर के दिन लोग एक दूसरे को रंग-बिरंगे अंडे गिफ्ट करते हैं। कहते हैं जिस तरह एक अंडे में से छोटा सा चूजा निकलता है ठीक उसी तरह यीशु ने भी पुनर्जन्म लेकर सुख और शांति का संदेश दिया था। तो आइये तो इस ईस्टर पर जानते हैं अलग-अलग तरह के अंडों की खास कहानियां। शुरुआत करते हैं मुर्गी के अंडे से…

मुर्गी के अंडे का शैल यानी खोल और उसका नैनोस्ट्रक्चर क्रमिक विकास का जबरदस्त मास्टरपीस है। शुरुआती दिनों में यह खोल बेहद मजबूत होता है। करीब तीन सप्ताह बाद इसमें से चूजा निकलने के समय तक यह बेहद पतला हो जाता है। इसके चलते चूजे को बाहर आने के लिए खोल फोड़ने में आसानी होती है।

  • ऐसा विकासात्मक प्रक्रिया के कारण होता है। दरअसल, चूजे की हड्डियों को बढ़ने और मजबूत होने के लिए जरूरी कैल्शियम अंडे के खोल की भीतरी परत से मिलता है। यह परत टूटकर अंदर झड़ती रहती है, यही कैल्शियम चूजे की हड्डियां बनाने का काम आता है।
  • शुतुरमुर्ग मौजूदा समय के पक्षियों में सबसे बड़ी और सबसे तेज दौड़ने वाली प्रजाति है। मादा शुतुरमुर्ग तो केवल एक नर से संबंध बनाती है, लेकिन नर कई मादा शुतुरमुर्गों से मेटिंग करता है। इन मादा शुतुरमुर्गों में सबसे प्रभावशाली मादा सामुदायिक घोंसले में अंडे देती है।
  • इसके बाद करीब चार दूसरी मादा शुतुरमुर्ग अंडे देती हैं। इनमें हर मादा के करीब 15 अंडे होते हैं। सबसे कमजोर अंडों को प्रमुख मादा छोड़ देती है और बाकी अंडों को नर शुतुरमुर्ग के साथ सेती है।
  • कीवी केवल इसलिए ही खास पक्षी नहीं कि वो उड़ नहीं सकते, बल्कि इसलिए भी उनके नाम से एक पूरे देश को जाना जाता है। वह देश है- न्यूजीलैंड। शरीर के आकार से तुलना करें तो कीवी दुनिया में सबसे बड़े अंडे देने वाले पक्षी हैं।
  • ​​​​​​कीवी के अंडे का वजन आधा किलोग्राम से ज्यादा होता है और वह मादा कीवी के तकरीबन पूरे शरीर को घेर लेता है। कीवी को चलने-फिरने से लेकर सांस लेने में भी दिक्कत होने लगती है। वहीं, एक बार अंडे से बाहर आने के बाद नवजात चूजे बहुत जल्द आत्मनिर्भर हो जाते हैं।
  • दुनिया में कोई भी माता-पिता अंटार्कटिका के सम्राट पेंगुइन की बेहद कठिन सालाना यात्रा का मुकाबला नहीं कर सकते। उड़ान न भर पाने वाले यह पक्षी अंडे देने के लिए 50 किमी से लेकर 120 किमी तक की यात्रा करके अपने प्रजनन क्षेत्रों तक पहुंचते हैं। मादा हर साल सिर्फ एक अंडा दे सकते हैं। यह उसके लिए बेहद खास घटना होती है।
  • 20 दिनों की इस यात्रा के दौरान वे बेहद ठंडे समुद्री पानी से गुजरते हैं। कई शिकारियों से बचते हैं। उनकी इसी यात्रा पर मार्च ऑफ द पेंगुइन्स नाम की डौक्यूमैंटरी बनी थी, जिसने ऑस्कर जीता था।
  • 17वीं सदी में विलुप्त होने वाले वाली एलिफैंट बर्ड, अब तक धरती पर मौजूद सबसे बड़ा पक्षी माना जाता है। इनकी लंबाई 3 मीटर से ज्यादा यानी करीब 10 फीट और वजन करीब 700 किलोग्राम तक होता था। 2015 में इनका एक काफी अच्छा अंडा अफ्रीका के मैडागास्कर में मिला था।
  • एलिफैंट बर्ड मुर्गी के अंडे से करीब 200 गुना बड़ा होता है। ऊपर तस्वीर में इसके अंडे की तुलना एक कीवी के कंकाल से की गई है। माना जाता है कि इंसानों की गतिविधियों के चलते यह विलुप्त हो गए। हालांकि कुछ रिसर्चर्स का दावा है कि एलिफैंट बर्ड धरती से 13वीं सदी यानी करीब 800 साल पहले ही गायब हो गए थे।
  • मुर्गी के अंडे हमारी रोज की जिंदगी में मौजूद हैं। शायद इसलिए हम कभी नहीं पूछते- पहले सांप आया या उसका अंडा। हम अक्सर भूल जाते हैं कि पक्षी ही नहीं धरती पर अन्य जीव भी अंडे देते हैं। ऐसे जीवों को रैपटाइल कहते हैं। इनमें सांप भी शामिल हैं।
  • ज्यादातर सांप अंडे देने के बाद उन्हें अकेला छोड़ देते हैं, लेकिन मादा अजगर तब तक अपने अंडे नहीं छोड़ती जब तक वह बच्चे अंडों से बाहर नहीं आ जाते। कोबरा की भी कुछ प्रजाति अपने अंडों की रक्षा करती हैं।
  • समुद्री कछुए पिछले कुछ सालों से जलवायु परिवर्तन, अवैध कारोबार और पर्यटन जैसी कारणों से अंडे देने के लिए जूझ रहे हैं। वे समुद्र किनारे के मैदानों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करते हैं और रेत में अंडे देने के लिए पानी से बाहर निकलते हैं। लेकिन अगर इंसान उन्हें अपनी गतिविधियों जैसे शोर या तेज रोशनी से परेशान कर दें तो वे बिना अंडे दिए ही समुद्र में वापस लौट जाते हैं।
  • कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन के दौरान भारत में ओडिशा के गाहिरमाथा समुद्र तट पर ओलिव रिडले नाम के कछुए कई सालों पर अंडे देने पहुंचे। इसी तरह की घटनाएं अमेरिका के फ्लोरिडा और थाईलैंड के तटों पर देखने को मिलीं।
  • पहली नजर में यह तस्वीर देखने में शायद अच्छी न लगे। दरअसल इस मेंढक की पीठ पर अंडे हैं, कोई बीमारी नहीं। यह मिडवाइफ टोड है। इसमें और बाकी मेंढकों में बड़ा अंतर है। इनकी मेटिंग पानी में नहीं बल्कि जमीन पर होती है।
  • इनमें नर मिडवाइफ टोड की जिम्मेदारी होती है कि वह अंडों को 30 दिनों तक अपने साथ लेकर चले। इसके बाद वह इन अंडो तो रख देता है और फिर नया जीवन चक्र शुरू हो जाता है। यह सब इनके नाम से भी जाहिर है।
  • डायनासोर के समय कोमोडो ड्रैगन भले ही एक छोटा प्राणी लगता हो, मगर आज वह दुनिया में छिपकली की सबसे बड़ी प्रजाति है। इसे एक राक्षस माना जाता है। इनकी मेटिंग बेहद हिंसक होती है। नर कोमोडो के बीच खूनी संघर्ष होता है। इसमें जीतने वाला कोमोडो ड्रैगन ही मादा कोमोडो के साथ रह पाता है।
  • मादा कोमोडो ड्रैगन एक बार में करीब 20 अंडे देती है। इन अंडों से सात से आठ महीनों बाद बच्चे निकलते हैं। इस दौरान मादा कोमोडो को नरों से अपने अंडे बचाने पड़ते हैं। इसके लिए वह अंडों को मिट्टी से ढक देती है।

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