नशा देकर मजदूरी कराने का आरोप: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार से मांगी रिपोर्ट, किसान नेता बोले- बदनाम करने की साजिश है

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चंडीगढ़23 मिनट पहले

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मजदूरों को नशा देकर काम करवाने के आरोपों को किसान नेताओं ने साजिश करार दिया है। - Dainik Bhaskar

मजदूरों को नशा देकर काम करवाने के आरोपों को किसान नेताओं ने साजिश करार दिया है।

  • भाकियू प्रवासी मजदूरों के प्रति पंजाब के किसानों के व्यवहार का सच लोगों और मीडिया के सामने लाएगी

उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले प्रवासी मजदूरों ने पंजाब के किसानों पर आरोप लगाए हैं कि वे उन्हें नशा देकर उनसे बंधुआ मजदूरी कराते हैं। गृह मंत्रालय ने पंजाब की मुख्य सचिव और DGP को भेजे पत्र में कहा है कि राज्य के सीमांत जिलों के किसान मजदूरों को पहले नशे का आदी बनाते हैं फिर उन्हें बंधक बनाकर अपने खेतों में अमानवीय तरीके से काम कराते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार से कहा है कि वह इस संबंध में कार्रवाई करके गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपे। इस मामले पर पंजाब के किसान संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शिरोमणि अकाली दल ने भी गृह मंत्रालय द्वारा पत्र में लिखी गई बातों को पंजाब के किसानों को बदनाम करने की साजिश करार दिया है।

भाकियू ने कहा कि सच सामने लाएंगे

भारतीय किसान यूनियन एकता (डकोंदा) के महासचिव जगमोहन सिंह पटियाला का कहना है कि किसान कृषि कानूनों के खिलाफ धरने पर बैठे हैं, इसलिए केंद्र सरकार ने अब किसानों को बदनाम करने की नई साजिश रची है। भाकियू एकता (डकोंदा) पंजाब में प्रवासी मजदूरों की स्थिति और उनके प्रति पंजाब के किसानों के व्यवहार का सच लोगों और मीडिया के सामने लाएगी।

चंदूमाजरा ने पत्र को विरोधाभासी बताया

शिरोमणि अकाली दल ने भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पंजाब के किसानों को बदनाम करने की साजिश रची है। पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने पत्र को विरोधाभासी बताया है। पत्र में एक तरफ तो दावा किया जा रहा है कि BSF ने 58 बंधक मजदूरों को छुड़ाया था, वहीं यह भी कहा गया है कि ‘मानव तस्कर गिरोह’ अच्छे वेतन का लालच देकर गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और अबोहर में उत्तर प्रदेश व बिहार के मजदूरों को बहला फुसलाकर लाते हैं।

औजला ने ओछी राजनीति के आरोप लगाए

अमृतसर से लोकसभा सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि केंद्र सरकार ओछी राजनीति पर उतर आई है। किसानों के प्रति केंद्र सरकार के रवैये से सभी वाकिफ हैं। उनके हलके में एक लाख किसान हैं और कहीं भी प्रवासी मजदूरों से अमानवीय व्यवहार नहीं किया जाता। अगर केंद्र सरकार को ऐसी किसी स्थिति का पता चला था तो मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस बारे में बात क्यों नहीं की गई? असली मुद्दों से भटकाने की साजिश हो रही है।

2019 और 2020 की रिपोर्ट का हवाला दिया गया

गृह मंत्रालय ने अपने पत्र में BSF द्वारा पेश की गई 2019 और 2020 की रिपोर्ट का हवाला दिया है। इसमें कहा गया है कि इन दो सालों में 58 बंधक मजदूरों को छुड़ाकर पंजाब पुलिस के हवाले किया है। हालांकि, पत्र में आरोपों के बारे में कोई तथ्यात्मक दस्तावेज या शिकायत की जानकारी नहीं भेजी गई है। पत्र के मुताबिक मजदूरों को अक्सर नशा देकर खेतों में काम करवाया जाता है। तय समय से भी ज्यादा काम करवाकर उन्हें मजदूरी भी नहीं दी जाती।

सीमांत जिलों गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और अबोहर में खेतों में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर यूपी और बिहार के पिछड़े इलाकों और गरीब परिवारों से संबंधित हैं। मानव तस्करी करने वाले गिरोह ऐसे मजदूरों को अच्छे वेतन का लालच देकर पंजाब लाते हैं, लेकिन पंजाब पहुंचने पर उनका शोषण किया जाता है। उनसे अमानवीय व्यवहार किया जाता है। पत्र में गृह मंत्रालय ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है।

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