61 साल में पहली बार 60 दिन का क्लोजर: 100 दिन तक 10 जिलों की प्यास बुझाने जितना पानी पाक जा रहा, इसलिए 3 साल तक 60-60 दिन ऐतिहासिक नहरबंदी

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पश्चिमी राजस्थान से10 मिनट पहलेलेखक: डीडी वैष्णव

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पानी जब बारिश में सतलज में पाक की तरफ छोड़ा जाता है तो वहां भी मानसून चल रहा होता है। पाक जानबूझकर पानी छोड़ने का आरोप भी लगाता रहा है। - Dainik Bhaskar

पानी जब बारिश में सतलज में पाक की तरफ छोड़ा जाता है तो वहां भी मानसून चल रहा होता है। पाक जानबूझकर पानी छोड़ने का आरोप भी लगाता रहा है।

  • 2.4 करोड़ आबादी को पानी पिलाने वाली इंदिरा गांधी नहर के असामान्य क्लोजर की पूरी कहानी
  • 61 साल में पहली बार मरम्मत के लिए इतनी लंबी रोक

पश्चिमी राजस्थान में खेती और पेयजल की लाइफलाइन इंदिरा गांधी नहर में 61 साल के इतिहास में पहली बार 60 दिन का क्लोजर 30 मार्च से शुरू होकर 28 मई तक चलेगा। ऐसा एक बार नहीं, लगातार 3 साल तक होगा यानी 60-70 दिन के तीन क्लोजर। लक्ष्य 2023 की गर्मियों तक 310 किमी के दायरे में नहर व इसके फीडर की मरम्मत का है, जिसमें इस साल 90.87 किमी की मरम्मत होगी। इसमें पंजाब में 41, हरियाणा में 10.67, राजस्थान में 13.4 किमी और 25.8 किमी मुख्य नहर सुधारी जाएगी।

सवाल ये है कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल हरिके बैराज से राजस्थान के हिस्से 15 हजार क्यूसेक पानी प्रतिदिन छोड़ा जाता है लेकिन नहर क्षतिग्रस्त होने से रोज 4 हजार क्यूसेक पानी बर्बाद हो जाता है। यही नहीं, नहर दुरुस्त न होने की वजह से हर बारिश के सीजन में राजस्थान के हिस्से का अनुमानित एक लाख क्यूसेक पानी सतलज नदी में छोड़ना पड़ता है, जो बहकर पाकिस्तान चला जाता है। यह इतना पानी है कि 10 जिलों की 100 दिनों की प्यास बुझा सकता है।

भारत : पानी सिर (सरहद) से ऊपर चला गया था

नहर क्षतिग्रस्त होने से राजस्थान के हिस्से का करीब 1 लाख क्यूसेक पानी पाक चला जाता है। पिछले सीजन में अधिकारियों ने इसका मुआयना किया था।

नहर क्षतिग्रस्त होने से राजस्थान के हिस्से का करीब 1 लाख क्यूसेक पानी पाक चला जाता है। पिछले सीजन में अधिकारियों ने इसका मुआयना किया था।

इंदिरा गांधी नहर- अलग-अलग हिस्से की होनी है मरम्मत

  • इंदिरा गांधी फीडर: कुल 204.51 किमी, मरम्मत 149.72 किमी
  • इंदिरा गांधी मुख्य नहर: कुल 445 किमी, मरम्मत 61 किमी
  • सरहिंद फीडर: कुल 136.24 किमी, मरम्मत 100.07 किमी

राजस्थान को रोज 4 हजार क्यूसेक कम मिल रहा है पानी

  • लगातार पानी प्रवाहित होने से नहर की दोनों दीवार (लाइनिंग) क्षतिग्रस्त, मिट्‌टी जमा हो रही।
  • राजस्थान को रोजाना 4 हजार क्यूसेक कम पानी मिल पा रहा। सरहिंद फीडर से 1610 क्यूसेक हमारा हिस्सा, लेकिन 200 से 300 क्यूसेक मिल रहा है।
  • पानी की बर्बादी रोकने को केंद्र, राजस्थान व पंजाब सरकार में 23 जनवरी 2019 को करार हुआ था। 1976 करोड़ रु. से नहर की सेहत सुधारी जा रही है। केंद्र 982 करोड़, राजस्थान 715.47 करोड़ व पंजाब 279.26 करोड़ खर्च कर रहा है।

10 वरिष्ठतम आईएएस, 15 मुख्य एवं 100 फील्ड इंजीनियराें ने बनाया प्लान
तीन साल पहले केंद्र, पंजाब, राजस्थान सरकारों के स्तर पर प्लानिंग हुई। 10 सीनियर आईएएस, 15 से ज्यादा चीफ इंजीनियर्स, 100 से ज्यादा फील्ड इंजीनियर्स, सेंट्रल वाटर कमीशन, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड, इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी), जल शक्ति मंत्रालय दोनों ही राज्यों के जल संसाधन विभाग के टॉप अफसर व इंजीनियर्स की टीम ने पूरा खाका तैयार किया।
फिर 4 दशक तक जरूरत व हिस्से का पूरा पानी मिलेगा : महाजन
राजस्थान ने नहर की रिलाइनिंग (मरम्मत) की पहल की। केंद्र व पंजाब भी साथ आए। नहर की हालत यह थी कि एक-दो साल में इसका पूरा सिस्टम ध्वस्त होने का खतरा था। लेकिन मरम्मत से पश्चिमी राजस्थान की जन, जल और आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और आने वाले 3-4 दशक तक हमारी जरूरत व हिस्से का पानी पूरा मिलता रहेगा।
नवीन महाजन, प्रमुख शासन सचिव,आईजीएनपी व जल संसाधन विभाग

नहर बंद रहेगी तो 10 जिलों में पानी का यह इंतजाम

  • बीकानेर: शोभासर और बिछवाल के बीच नहर में पोंडिंग व रिजर्वायर बनाए हैं, 30 दिन पानी दिया जाएगा।
  • नागौर: नोखा दहिया में पोंडिंग की गई है, यहां से 30 दिन पीने का पानी नागौर और इससे जुड़े इलाकों को मिलेगा।
  • जोधपुर: मुख्य नहर में आरडी संख्या 1121 पर स्टोरेज होगा। जोधपुर को 25 दिन 250 क्यूसेक पानी मिलेगा।
  • बाड़मेर: बाड़मेर लिफ्ट नहर के लिए आरडी संख्या 1458 पोडिंग होगी। 40 दिन रोज 80 क्यूसेक पानी मिलेगा।
  • जैसलमेर: सागरमल गोपा व रामदेव सब ब्रांच की टेल तक 20 दिन की पोडिंग होगी। इससे 30 दिन पानी मिलेगा।
  • चूरू: रावतसर शाखा व कुंभाराम आर्य लिफ्ट नहर में 30 दिन का पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
  • गंगानगर व हनुमानगढ़: मुख्य नहर व वितरिकाओं में 300 जगह पर पोडिंग। मुख्य क्लोजर में पानी मिलेगा।
  • सीकर व झुंझुनूं: मलसीसर के पास नहर में पानी का स्टोरेज होगा। सीकर में लक्षमणगढ़ तक सप्लाई है।

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