भास्कर इंटरव्यू: ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ एशिया की टॉप 40 एक्शन फिल्मों में शामिल, फिल्म के एक्टर अभिमन्यु बोले- किरदार की खातिर 3 महीने तक घर में किसी से बात नहीं की थी

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  • ‘Mard Ko Dard Nahi Hota’ Is Among The Top 40 Action Films In Asia, The Actor Of The Film Abhimanyu Said Didn’t Talk To Anyone In The House For 3 Months For The Sake Of The Character.

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5 मिनट पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

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अभिमन्यु दसानी स्टारर ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ फिल्म टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की बेस्ट एक्शन और मार्शल आर्ट फिल्म की 40 वें लिस्ट में अपनी जगह बना ली है। इसमें फिल्म ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ 16 वें स्थान पर है। इसे लेकर खुशी व्यक्त करते हुए अभिमन्यु ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में इसकी तैयारी आदि के बारे में बताया।

Q-जब आप फाइनेंस छोड़कर कर एक्टिंग में करियर बनाने आए, तब आपकी मां बहुत घबराई हुई थीं, आज मिल रहे अवॉर्ड-रिवॉर्ड पर मां क्या कहती हैं?

A-मॉम बहुत खुश हैं कि मैंने अपना खुद का रास्ता चुना और मैं अपने खुद के पैरों पर खड़ा हुआ हूं। जो भी लोग थे उन्हें भरोसा दिलाया कि मेहनत और संघर्ष से आज, कल, परसों कभी न कभी तो फल मिलेगा ही। मुझे खुशी है कि मैंने पेशेंस रखा और मॉम को प्राउड फील कराया।

Q-फिल्म ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ को मिली उपलब्धि पर क्या कहेंगे?

A-बहुत अच्छा लगता है कि टीम ने ईमानदारी के साथ जो मेहनत की है, उसका एप्रिसिएशन उन्हें सारी जगहों से मिल रहा है। फिल्म को रिलीज हुए दो साल हो गए हैं। अब देखता हूं कि जो फिल्म के डीओपी, स्टाइलिश, आदि हैं, वह बड़ी-बड़ी फिल्में कर रहे हैं और अपनी जिंदगी में बहुत सफल हो गए हैं। वह नए मुकाम पर आए हैं और यह देखकर बहुत खुशी होती है। इंटरनेशनल अवार्ड और एप्रिसिएशन मिलने पर तो बहुत ही अच्छा लगता है। काश! यहां भी थोड़ा प्यार मिल जाए और लोग फिल्म को देख लें क्योंकि एक्चुअल में हमने फिल्म इंडिया के लिए बनाई थी। पर फिल्म को इंटरनेशनल और क्रिटिक्स का एप्रिसिएशन मिल गया है, अब एक कॉन्फिडेंस भी आया है कि जो कर रहे हैं वह सही है और हमें इस तरह लगे रहना चाहिए।

Q-इसके लिए एक्शन सीखने और एक्टिंग करने की कोई चुनौती भरी याद शेयर करेंगे?

A-इस फिल्म के लिए मैंने स्टार्टिंग में मार्शल आर्ट सीखा था और उसका 9 महीने का ट्रेनिंग पीरियड था। दिन में 7 से 8 घंटे लगातार ट्रेनिंग हुआ करती थी। सुबह 3 घंटे और शाम को 3 घंटे मार्शल आर्ट और दिन में वेट ट्रेनिंग और स्विमिंग करता था। साथ में बायोलॉजी पर काफी स्टडी कर रहा था कि इंजरी कैसे होती है, उससे बचाते कैसे हैं और उससे रिकवर कैसे करते हैं क्योंकि यह सब चीज सूर्या के नॉलेज के लिए बहुत इंपॉर्टेंट थी। कैरेक्टर के लिहाज से सूर्या वेल नॉर्मल चाइल्ड नहीं था। उसका किरदार प्ले करना, उसका कोई एंबीशन नहीं होना, सोशलाइजिंग का तरीका नहीं होना, वह सब मुझे सीखना पड़ा। हम सोसाइटी से जो सीखकर आए हैं, उसे ब्रेकडाउन करना पड़ा और यह सब काफी मेहनत करनी पड़ी सूर्या के कैरेक्टर में घुसने के लिए। लास्ट के तीन महीने सिर्फ ट्रेनर और डायरेक्टर को छोड़कर मैं किसी से बात नहीं करता था क्योंकि सूर्या की कंडीशन यही थी कि वह घर पर खाली अपने पिता जी से बात कर पाता था। उसे बाहर किसी से बात करने का तरीका नहीं आता और नॉलेज नहीं थी और इसे अंडरस्टैंड करने के लिए मैंने तीन महीने घर पर भी किसी से बात नहीं की।

Q-क्या आप कोई एक्शन फिल्म कर रहे हैं?

A-अभी तो नेटफ्लिक्स की अप्कमिंग रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘मीनाक्षी सुंदरेश्वर’ कर रहां हूं। इसे विवेक सोनी डायरेक्ट कर रहे हैं। दूसरी फिल्म को शब्बीर खान डायरेक्ट कर रहें हैं और वह फिल्म ‘निकम्मा’ है। इसमें शिल्पा शेट्टी, अनिल कपूर आदि हैं। इसके अलावा उमेश शुक्ला के साथ फिल्म ‘आंख मिचौली’ कर रहा हूं और इन सबमें मेरा बड़ा इंटरेस्टिंग कैरेक्टर है।

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