मीडिया रिपोर्ट्स में दावा: म्यांमार की सेना ने बॉर्डर से सटे गांवों पर हवाई हमले किए, 3 हजार से ज्यादा लोग डरकर थाईलैंड भागे

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यांगोन4 मिनट पहले

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यह फोटो करेन प्रांत में हवाई हमले वाली जगह की बताई जा रही है। इसमें दिख रहे लोग म्यांमार सेना की एयर स्ट्राइक से बचने के लिए गुफा में छिपे हैं। - Dainik Bhaskar

यह फोटो करेन प्रांत में हवाई हमले वाली जगह की बताई जा रही है। इसमें दिख रहे लोग म्यांमार सेना की एयर स्ट्राइक से बचने के लिए गुफा में छिपे हैं।

म्यांमार में सेना की कार्रवाई में 114 लोगों के मारे जाने के अगले दिन बॉर्डर से सटे एक गांव में हवाई हमले की खबरें आई हैं। इसमें बच्चों समेत कई लोगों की मौत का भी दावा किया जा रहा हे। रायटर्स ने लोकल मीडिया के हवाले से बताया है कि यह गांव म्यांमार के दक्षिणपूर्वी करेन राज्य में है।

सेना के हमले से डरकर यहां के लगभग 3,000 लोग रविवार को थाईलैंड भाग गए। यह इलाका हथियारबंद एथेनिक ग्रुप करेन नेशनल यूनियन (KNU) के कब्जे वाला माना जाता है। KNU का कहना है कि वह उन सैकड़ों लोगों को शरण दे रहा है, जो हाल के हफ्तों में देश में बढ़ी हिंसा के बीच भाग सेंट्रल म्यांमार पहुंचे हैं।

म्यांमार की सेना ने जिस गांव पर हमला किया, वह थाईलैंड की सीमा से सटा हुआ है।

म्यांमार की सेना ने जिस गांव पर हमला किया, वह थाईलैंड की सीमा से सटा हुआ है।

KNU के मुताबिक, सेना का हमला रात करीब 8 बजे हुआ। उसके ब्रिगेड-5 फोर्स के नियंत्रण वाले इलाके में फाइटर जेट्स ने बम गिराए। इस ग्रुप का कहना है कि पिछले महीने के सैन्य तख्तापलट के बाद गृह युद्ध की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, इस मामले पर म्यांमार की सेना की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

विद्रोही गुट का कहना है कि वह उन लोगों को शरण दे रहा है, जो सेना की कार्रवाई से डरकर उनके इलाके में आए हैं।

विद्रोही गुट का कहना है कि वह उन लोगों को शरण दे रहा है, जो सेना की कार्रवाई से डरकर उनके इलाके में आए हैं।

2015 में सरकार से किया था युद्धविराम समझौता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस इलाके में बीते कुछ साल में यह सबसे बड़ा हमला है। KNU ने 2015 में सरकार के साथ युद्धविराम समझौता किया था। सेना ने बीती 1 फरवरी को सरकार का तख्तापलट कर दिया।

इससे पहले शनिवार को KNU ने कहा था कि ब्रिगेड-5 फोर्सेज ने सेना के एक बेस पर हमला किया है। इसमें लेफ्टिनेंट कर्नल सहित 10 सैनिकों की मौत हुई थी। इसी दिन म्यांमार की सेना ने राजधानी नेपाईतॉ में आर्म्ड फोर्सेज डे मनाया था।

शनिवार को 114 प्रदर्शनकारियों की जान गई
म्यांमार में तख्तापलट के खिलाफ जारी हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों की झड़प में शनिवार को 114 लोगों की मौत हुई थी। तख्तापलट के बाद एक दिन में हुईं मौतों की यह सबसे बड़ी संख्या है। शनिवार को ही म्यांमार में आर्म्ड फोर्सेज डे मनाया गया। इस दिन सेना परेड निकालकर अपनी ताकत का प्रदर्शन करती है।

म्यांमार नाउ न्यूज पोर्टल ने अपनी रिपोर्ट में शनिवार को 44 शहरों में प्रदर्शन और 114 लोगों के मारे जाने की खबर दी थी। वहीं एक न्यूज पेपर ने यह संख्या 59 बताई है। इनमें 3 बच्चे भी शामिल थे। मीडिया और इंटरनेट पर रोक की वजह से मौतों की सही संख्या सामने आ पाना मुमकिन नहीं है।

12 देशों के डिफेंस चीफ ने म्यांमार सेना की आलोचना की
12 देशों के रक्षा प्रमुखों ने रविवार को म्यांमार सेना की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, डेनमार्क, ग्रीस, नीदरलैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया और जापान शामिल हैं। एक ज्वाइंट स्टेटमेंट में उन्होंने कहा कि हम म्यांमार की सेना और और सिक्योरिटी सर्विस के निहत्थे लोगों ताकत के इस्तेमाल की निंदा करते हैं।

उन्होंने सेना से हिंसा रोकने और म्यांमार के लोगों के सामने सम्मान और भरोसा बहाल करने के लिए काम करने की गुजारिश की। बयान में कहा गया है कि प्रोफेशनल आर्मी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का पालन करती है और लोगों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होती है, न कि उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए।

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