कैसे दोगुनी हो किसानों की आय: कमाई का सबसे ताजा अनुमान 8 साल पुराना; तब किसान की इनकम 6,426 रु. थी, 52% परिवारों पर 47 हजार कर्ज था

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नई दिल्ली4 घंटे पहलेलेखक: मुकेश कौशिक

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विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों की इनपुट लागत बढ़ती जा रही है, जबकि जीवनयापन महंगा होता जा रहा है। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों की इनपुट लागत बढ़ती जा रही है, जबकि जीवनयापन महंगा होता जा रहा है। (फाइल फोटो)

कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के बीच केंद्र सरकार बार-बार दावा कर रही है कि उसका लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करना है। जबकि हकीकत यह है कि सरकार के पास किसानों की आमदनी का जो सबसे ताजा आंकड़ा है वह भी आठ साल पुराना है। वर्ष 2013 के इस आंकड़े के मुताबिक, किसान परिवार की औसत मासिक आय 6,426 रुपए है।

बजट सत्र में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संसद में बताया कि सबसे ताजा और आखिरी अनुमान राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के जुलाई 2012 से जून 2013 के बीच अध्ययन में सामने आया। इन आंकड़ोें के मुताबिक, किसान परिवार की औसत वार्षिक आमदनी 77,112 रुपए यानि 6,426 रुपए मासिक थी। वहीं, किसान परिवार का औसत मासिक खर्च 6,223 रुपए है। ऐसे में महीने में 203 रुपए बचते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, आठ साल पहले 52% किसान परिवारों पर औसतन 47 हजार रुपए कर्ज था। नाबार्ड के 2016—17 के बीच हुए सर्वे के मुताबिक, चार साल में किसानों की आय 2,505 रुपए बढ़ी थी। महंगाई दर जोड़कर देखा जाए तो यह वृद्धि भी निगेटिव में चली जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों की इनपुट लागत बढ़ती जा रही है जबकि जीवनयापन महंगा होता जा रहा है। ऐसे में आय दोगुनी करना बेमानी है क्योंकि जीवनयापन का खर्च उससे ज्यादा अनुपात में बढ़ता है तो चार गुना आय के बावजूद जीवन की गुणवत्ता नहीं बढ़ेगी।

इनपुट लागत बढ़ने के कारण हालत बुरी
रिपोर्ट के मुताबिक, आठ साल पहले 52 प्रतिशत किसान परिवारों पर औसतन 47 हजार रुपये कर्ज था। नाबार्ड के 2016—17 के बीच हुए सर्वे के मुताबिक चार साल में किसानों की आय 2,505 रुपए बढ़ी थी। महंगाई दर जोड़कर देखा जाए तो यह वृद्धि भी निगेटिव में चली जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों की इनपुट लागत बढ़ती जा रही है, जबकि जीवनयापन महंगा होता जा रहा है। ऐसे में आय दोगुनी करना बेमानी है, क्योंकि जीवनयापन का खर्च उससे ज्यादा अनुपात में बढ़ता है तो चार गुना आय के बावजूद जीवन की गुणवत्ता नहीं बढ़ेगी।

भूमिहीन किसानों की न अलग गणना न सर्वे
कृषि मंत्री ने इसी 9 फरवरी को लोकसभा को बताया था कि देश में भूमिहीन किसानों की अलग से गणना या सर्वे नहीं होता। लिहाजा उनकी जानकारी सरकार के पास नहीं है। अनुमान के मुताबिक देश में 70% किसान भूमिहीन और कृषक मजदूर हैं।

आठ साल में दोगुनी से ज्यादा बढ़ी देश में प्रति व्यक्ति आय
2012—13 में देश में प्रति व्यक्ति औसत मासिक आय 5,729 रुपए थी। परिवार की यूनिट में 5.1 सदस्य थे। ऐसे में सामान्य परिवार की औसत आमदनी करीब 29 हजार रुपए थी। जबकि तब किसान परिवार की प्रति व्यक्ति मासिक आय केवल 1,260 रुपए थी। वहीं, 2019—20 में देश में प्रति व्यक्ति आय सालाना 1,34,226 रुपए रही, जो 11,185 रुपए प्रतिमाह है।

अगर आय दोगुनी करनी है तो उसके लिए सही आंकलन जरूरी : सिंह
राजनीतिक एवं सामाजिक विश्लेषक एनके सिंह के मुताबिक, सरकार को किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा के साथ ही मौजूदा आमद का आकलन करना था। आठ साल पुरानी रिपोर्ट पर अनुमानित आंकड़ों से सही निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकते। इस बारे में बनी दलवई समिति की 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक आय दोगुनी करने के लिए 6.399 लाख करोड़ रुपए का निवेश करना होगा और कृषि निर्यात तीन गुना बढ़ाना होगा।

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