भास्कर इंटरव्यू: NASA के मिशन मंगल में अहम रोल निभाने वालीं स्वाति बोलीं- मेरी सफलता में भारतीय परवरिश की बड़ी भूमिका

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3 घंटे पहलेलेखक: वॉशिंगटन से रोहित शर्मा

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का सबसे आधुनिक रोवर पर्सीवरेंस गुरुवार रात मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक उतर गया। अमेरिका की इस उपलब्धि पर भारत को भी गर्व है, क्योंकि रोवर की सफल लैंडिंग के बाद टचडाउन कन्फर्म्ड कहते हुए सबसे पहली सूचना देने वाली फ्लाइट कंट्रोलर स्वाति मोहन भारतवंशी हैं। माथे पर बिंदी के साथ धैर्य से पर्सीवरेंस के हर स्टेप की घोषणा करती स्वाति नासा में गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल्स ऑपरेशन की प्रमुख हैं। स्वाति जब एक साल की थीं, तभी उनके परिजन अमेरिका चले गए थे। भास्कर से उनकी एक्सक्लूसिव बातचीत के अंश पढ़िए…

रोवर की लैंडिंग के वक्त मन में क्या चल रहा था?
मैं इतनी एकाग्रचित्त होकर काम कर रही थी कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आसपास क्या हो रहा है। मैं अपना टास्क पूरा करने में इतनी तल्लीन थी कि मुझे खड़े होकर खुशी मनाने में भी समय लगा।

मिशन फेल होने को लेकर कोई डर था?
हां, पर्सीवरेंस की लैंडिंग को सफल बनाने के लिए हमने काफी समय दिया। बहुत सारी प्लानिंग की, जिनमें उन दृश्यों की पहचान करना भी शामिल था, जब चीजें हमारे मुताबिक न हों। मैंने उन सभी योजनाओं की शीट्स बना रखी थी। मेरे मॉनिटर के नीचे फ्लोचार्ट रखे थे। इनमें यह लिखा था कि अगर लैंडिंग ठीक से नहीं हुई तो हमें क्या करना है और क्या कहना है। हम ऐसे सभी दृश्यों से गुजर चुके थे। जैसे ही लैंडिंग हुई, मैंने उन सभी दूसरे दृश्यों को डस्टबिन में फेंक दिया। (हंसने लगीं)

लैंडिंग से एक रात पहले आप सोईं या नहीं?
मैंने सोने की कोशिश की, लेकिन सुबह 4:30 बजे फिर जाग गई। लैंडिंग की तैयारियों के चलते पिछले दो हफ्तों से इस समय उठने की तैयारी कर रही थी, लेकिन हमने पिछली रात सेलिब्रेट किया। मुझे पूरी दुनिया से फोन आए।

परवरिश…? सफलता में भारत से जुड़ाव?
मैं पेनसिल्वेनिया में रहती थी। उसके बाद वाॅशिंगटन डीसी चली गई। मैं कहूंगी कि भारतीय परवरिश की बहुत बड़ी भूमिका है। मेरे परिवार में भारतीय मूल्यों की विरासत है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा है।

सक्सेस स्टाेरी से बच्चे क्या सीख सकते हैं?
मैं कहूंगी कि अपने पैशन काे पूरा करें और उस पर डटे रहें। ऐसी काेई एक उपलब्धि या काेई अनुभव नहीं है जाे आपकाे ताेड़ दे या आपकाे सफल बना दे। सफलता हो या नाकामी, यह इस पर निर्भर करता है कि उससे आप क्या सीखते हैं और उस अनुभव काे आप किस तरह से लेते हैं। यह आपके आगे बढ़ने में बहुत मदद करता है।

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