विश्व भारती का दीक्षांत समारोह: मोदी बोले- आप क्या करते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका माइंडसेट पॉजिटिव है या निगेटिव

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नई दिल्ली33 मिनट पहले

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मोदी ने कहा कि रास्ते हमेशा खुले होते हैं। अगर अपना हित देखेंगे तो आक्रोश दिखेगा। अगर नेशन फर्स्ट की अप्रोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो सॉल्यूशन बनकर उभरेंगे। - Dainik Bhaskar

मोदी ने कहा कि रास्ते हमेशा खुले होते हैं। अगर अपना हित देखेंगे तो आक्रोश दिखेगा। अगर नेशन फर्स्ट की अप्रोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो सॉल्यूशन बनकर उभरेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की विश्व भारती यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। मोदी ने कहा कि जो दुनिया में आतंक फैला रहे हैं, उनमें भी कई हाई एजुकेटेड हैं। दूसरी तरफ ऐसे भी हैं लोग हैं जो कोरोना जैसी महामारी से निजात दिलाने के लिए जान लगा देते हैं। आप क्या करते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका माइंडसेट पॉजिटिव है या निगेटिव।

मोदी ने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की अद्भुत धरोहर का हिस्सा बनना, आप सबसे जुड़ना मेरे लिए प्रेरक, आनंददायक और नई ऊर्जा देने वाला है। इस बार तो मुझे कुछ समय के अंतराल पर दूसरे बार मौका मिला। आपके इस महत्वपूर्ण अवसर पर आपके माता-पिता, गुरुजनों को बधाई देता हूं।

मोदी के भाषण की अहम बातें

गुरुदेव ने लिखा था- देश को एकसूत्र में पिरोना है
मोदी ने कहा कि आज छत्रपति शिवाजी की जयंती पर भारत के लोगों को बहुत बधाई देता हूं। गुरुदेव ने भी शिवाजी पर कविता लिखी थी- ‘एक शताब्दी से पहले किसी अनाम दिन, मैं उस दिन को आज नहीं जानता। किसी पर्वत की ऊंची चोटी पर, किसी जंगल में आपको ये विचार आया था कि आपको देश को एकसूत्र में पिरोना है, खुद को एक देश के लिए समर्पित करना है।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि टैगोर की इसी भावना को जीवित रखना है। गुरुदेव इसे यूनिवर्सिटी के रूप में देखना चाहते तो इसे कोई और नाम भी दे सकते थे। पर उन्होंने इसे विश्वभारती नाम दिया। गुरुदेव की विश्वभारती से अपेक्षा थी कि जो यहां सीखने आएगा वो दुनिया को भारतीयता की दृष्टि से देखेगा। उन्होंने इसे सीखने का ऐसा स्थान बनाया जो यहां न केवल शोध करें, बल्कि गरीबों के लिए भी काम करें। पहले यहां से निकले छात्रों ने यही किया। आपसे भी यही उम्मीद है।

नेशन फर्स्ट की अप्रोच के साथ बढ़ेंगे तो सॉल्यूशन बनकर उभरेंगे
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार सत्ता में रहते हुए संयमित और संवेदनशील रहना पड़ता है, उसी प्रकार शोध भावी पीढ़ियों के लिए धरोहर है। इतिहास और वर्तमान में अनेक उदाहरण हैं। जो आतंक फैला रहे हैं, उनमें भी कई हाईली एजुकेटेड हैं। तो कोरोना में कई लोग महामारी से बचाने में लगे हुए हैं। ये आप पर निर्भर करता है कि आप समस्या का हिस्सा बनना चाहते हैं या समाधान का। रास्ते हमेशा खुले होते हैं। अगर अपना हित देखेंगे तो आक्रोश दिखेगा। अगर नेशन फर्स्ट की अप्रोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो बुरी शक्तियों में भी अच्छा दिखेगा। आप खुद में सॉल्यूशन बनकर उभरेंगे।

गुरुदेव ने देश को शिक्षा की परतंत्रता से मुक्त करने की व्यवस्था की
मोदी ने कहा कि फैसला लेने में मुश्किल होने लगे तो इसे संकट मानना चाहिए। आज का युवा फैसला लेने में सक्षम है। मेरे साथ युवाओं की ताकत है। जीवन के पड़ाव में अनेक अनुभव मिलेंगे। भारत पर ब्रिटिश एजुकेशन सिस्टम थोपे जाने से पहले थॉमस मुनरो ने भारत की शिक्षा व्यवस्था की ताकत को अनुभव किया था। विलियम एडम ने 1830 में पाया था कि भारत में 1800 से ज्यादा ग्रामीण स्कूल थे। अंग्रेजों के कालखंड और उसके बाद हम कहां से कहां पहुंच गए। गुरुदेव ने शिक्षा व्यवस्था विकसित की, वह भारत को शिक्षा की परतंत्रता से मुक्त करने के लिए की थी।

छात्रों से कहा- दुनिया आपसे बहुत कुछ चाहती है
प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल एक भारत-श्रेष्ठ भारत की प्रेरणास्थली और कर्मस्थली रहा है। आज भी नजरें आप पर हैं। ज्ञान को कोने-कोने में पहुंचाने में विश्वभारती की बड़ी भूमिका है। आज भारत जो है, जो मानवीयता हमारे कण-कण में है, उसे देखते हुए विश्वभारती को नेतृत्व करना चाहिए। जब आजादी के 100 साल होंगे, तब तक विश्वभारती के सबसे बड़े लक्ष्य क्या होंगे, इस पर गुरुजनों के साथ बात करें। बापू जो ग्राम स्वराज की बात करते थे, क्या वह साकार हो सकती है। आप अपने संकल्पों को सिद्धि में बदलें। आज दुनिया आपसे बहुत कुछ चाहती है। 21वीं सदी में भारत ऊंचा स्थान हासिल करे, इसके लिए और बेहतर प्रयास करने होंगे।

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