भास्कर इंटरव्यू: मेट्रोमैन ई. श्रीधरन बोले- भाजपा ही मेरी काबिलियत का इस्तेमाल कर सकती है

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तिरुअनंतपुरम5 घंटे पहलेलेखक: केए शाजी

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बीजेपी की विजय संकल्प यात्रा जब रविवार को श्रीधरन के गृहनगर मल्लापुरम पहुंचेंगे, तो ‘मेट्रोमैन’ पार्टी की सदस्यता लेंगे। - Dainik Bhaskar

बीजेपी की विजय संकल्प यात्रा जब रविवार को श्रीधरन के गृहनगर मल्लापुरम पहुंचेंगे, तो ‘मेट्रोमैन’ पार्टी की सदस्यता लेंगे।

  • 88 की उम्र में ई. श्रीधरन का केरल से चुनाव लड़ने का इरादा

मेट्रोमैन ई. श्रीधरन रविवार, 21 फरवरी को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो रहे हैं। इसी अप्रैल-मई में केरल में विधानसभा चुनाव हैं। इसके मद्देनजर भाजपा वहां रविवार से ‘विजय संकल्प यात्रा’ निकाल रही है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन कासरगोड से जब इस यात्रा को लेकर रविवार को श्रीधरन के गृहनगर मल्लापुरम पहुंचेंगे, तो ‘मेट्रोमैन’ भी भाजपा और उसकी यात्रा के सहभागी हाे लेंगेे।

दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान उन्होंने खुद यह जानकारी दी। इतना ही नहीं 88 साल की उम्र में चुनाव लड़ने का जज्बा, राजनीतिक पारी के लिए भाजपा का ही चुनाव क्यों और राजनीति के जरिए वे आखिर करना क्या चाहते हैं, ऐसे हर सवाल का उन्होंने बेबाक जवाब दिया है। उनसे तमाम मुद्दों पर बातचीत के अंश…

आप 88 वर्ष के है। इस उम्र में क्या आप आगामी विधानसभा में चुनाव लड़ना पसंद करेंगे ?

मैं सत्ता का भूखा नहीं हूं। जीवनभर राष्ट्रनिर्माण के लिए निरंतर काम किया है। अब भी यही करना चाहता हूं। बची जिंदगी राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की विचारधारा को मजबूत करने के लिए समर्पित करना चाहता हूं। रही बात चुनाव की, पार्टी कहेगी तो किसी भी जगह से लड़ने के लिए तैयार हूं। हालांकि मेरी प्राथमिकता मेरा गृहक्षेत्र मल्लापुरम ही होगा।

क्या आपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की सलाह पर यह फैसला लिया?

नहीं, मेरी चर्चा पार्टी के प्रदेश नेतृत्व से हुई है। संभव है कि उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व को इस बारे में अवगत करा दिया हो। राज्य इकाई ने पहले ही मुझसे पार्टी का घोषणा पत्र बनाने में योगदान मांगा है। मैं बना भी रहा हूं।

राजनीति में आने की वजह क्या है और आपने भाजपा को ही क्यों चुना?

यह अचानक लिया गया निर्णय नहीं है। मैं 2011 में रिटायर होने के बाद से ही लोगों के लिए काम करना चाहता था। अकेले काम करने में अक्षम महसूस कर रहा था। इसलिए राजनीतिक क्षेत्र में जाने पर विचार किया। केरल के सत्तारुढ़ वाम दल और विपक्षी कांग्रेस के गठबंधन, दोनों ने निराश किया। राष्ट्रीय हित इनके एजेंडे में नहीं हंै। इनके नेता सिर्फ अपने लिए काम कर रहे हैं। मैंने महसूस किया कि भाजपा से मेरी विचारधारा मिलती है। भाजपा एक मात्र ऐसी पार्टी है जिसके साथ मैं खुद को जोड़ सकता हूं। भाजपा ही मेरी काबिलियत का राज्य व राष्ट्र निर्माण में सर्वोत्तम इस्तेमाल कर सकती है। इसका दृष्टिकोण भविष्यमुखी है।

आप किस मकसद से राजनीति में आ रहे हैं ?

राष्ट्रहित में मैं पार्टी ज्वाइन कर रहा हूं। आज भारत के विरोध में काम कर रही ताकतें भारत की छवि दुनिया में धूमिल करने की मुहिम चला रही हैं। दुर्भाग्य से देश की विपक्षी पार्टियों ने भी इस मुहिम को समर्थन दे रखा है। यह सब मात्र भाजपा के अंधे-विरोध में किया जा रहा है। जबकि केंद्र की सरकार ने राष्ट्र और जनता के पक्ष में कई अच्छे काम किए हैं। मैं इसी क्रम को आगे बढ़ाना चाहता हूं।

आपने दिल्ली, कोलकाता मेट्रो और कोंकण रेलवे जैसी परियोजनाओं पर काम किया है, क्या कभी राजनीतिक हस्तक्षेप का सामना किया?

मैंने अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अपना सर्वोत्तम देने की कोशिश की। कभी-कभी मतभेद हुए। राजनीतिक दबाव भी आए। लेकिन मैंने मतभेदों तो पाटने की कोशिश की। कभी उन्हें बढ़ने नहीं दिया।

आप केरल की वाम गठबंधन सरकार के साथ भी काम कर रहे हैं। क्या यह जारी रहेगा?

बीते 5 वर्षों में कोच्चि मेट्रो और पलारीवट्टोम रोड ओवरब्रिज के सलाहकार के तौर पर मेरा योगदान बहुत सीमित रहा है। भ्रष्टाचार और विशेषज्ञता की कमी के कारण मेरे रिश्ते अस्थाई हो गए थे। वैसे भी दोनों प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं और मैं जिम्मेदारी से मुक्त हूं। मेरे जुड़ाव को वाम दलों के प्रति मेरे झुकाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

मेट्रो जरूरी है, पानी भी उतना ही जरूरी है। आज प्रोजेक्ट की वजह से पानी दूषित होता जा रहा है, आप अपनी सिविल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल इस क्षेत्र में भी करेंगेे?

यह बहुत बड़ा मुद्दा है। हम सबको मिलकर इसे सुलझाना चाहिए। पार्टी में जुड़ने के बाद हर स्तर पर मैं अपनी काबलियत का इस्तेमाल करके इस मुद्दे को उठाने और इसे सुलझाने की सतत प्रयास करता रहूंगा। इसके लिए जरूरी नीति निर्धारण में भी भरपूर योगदान दूंगा।

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