तेंदुए की पकड़ से मजबूत राखी का रिश्ता: बहन को तेंदुआ खींचता रहा, भाई ने एक हाथ से बाइक चलाई, दूसरे से बहन को जकड़ा और तेंदुआ हार गया

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सिन्नर (नासिक, महाराष्ट्र)8 घंटे पहले

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17 वर्षीय तृप्ति रवींद्र तांबे तेंदुए के पंजे की मार से जख्मी हुई है, वहीं उसके ममेरे भाई यश अशोक वाजे के पैर में तेंदुए के दांत धंसे हैं। - Dainik Bhaskar

17 वर्षीय तृप्ति रवींद्र तांबे तेंदुए के पंजे की मार से जख्मी हुई है, वहीं उसके ममेरे भाई यश अशोक वाजे के पैर में तेंदुए के दांत धंसे हैं।

  • महाराष्ट्र में स्कूल जाते भाई-बहन पर तेंदुए ने किया हमला, भाई की हिम्मत से बची दोनों की जान

महाराष्ट्र के नासिक जिले में एक भाई अपनी बहन को तेंदुए के मुंह से खींच लाया। दरअसल, 14 साल का भाई बाइक से 17 साल की बहन को स्कूल के लिए बस स्टॉप तक छोड़ने निकला था। जंगल के रास्ते में झाड़ियों में छुपे तेंदुए ने दाेनों पर हमला कर दिया। तेंदुआ पहले बाइक चला रहे भाई के पैर पर झपटा। उसने पैर झटका तो तेंदुए के मुंह से उसका पैर छूट गया। इसके बाद दौड़ता हुआ तेंदुआ बहन पर लपका, लेकिन उसके मुंह में सिर्फ लड़की का बैग आया। डरा हुआ भाई फिर भी बाइक चलाता रहा। हालांकि, 4 किमी जंगल के सुनसान रास्ते पर तेंदुए की तमाम कोशिशें असफल रहीं और उसे हारकर लौटना पड़ा। किसी तरह दोनों भाई-बहन बस स्टॉप के बजाये जान बचाकर स्कूल पहुंचे। घटना बुधवार की है। 17 वर्षीय तृप्ति रवींद्र तांबे तेंदुए के पंजे की मार से जख्मी हुई है, वहीं उसके ममेरे भाई यश अशोक वाजे के पैर में तेंदुए के दांत धंसे हैं। पढ़िए यश की आपबीती…

200 मीटर तक तेंदुआ पीछा करता रहा, हम बस के लिए रुकना भी भूल गए, हमारी बाइक सीधे स्कूल पहुंचकर रुकी

बुधवार सुबह छह बजे का समय था। मैं बुआ की बेटी तृप्ति को 10 किमी दूर स्कूल के लिए छोड़ने बाइक से निकला था। 4 किमी के बाद स्कूल तक के लिए बस मिल जाती थी। इसलिए सोचा कि थोड़ी देर में ही लौट आऊंगा। लेकिन 4 किमी का वह रास्ता जीवन की परीक्षा साबित हुआ।

हम घर से कुछ ही दूर आगे बढ़े थे कि झाड़ी में छुपकर बैठे तेंदुए ने छलांग लगाकर मेरा पैर अपने मुंह में दबोच लिया। मैंने हिम्मत जुटाकर पैर को झटका दिया तो उसके मुंह से मेरा पैर छूट गया, लेकिन दांत पैर में गड़ गए। तेंदुआ तो जैसे प्रण करके आया था कि शिकार करके ही मानेगा। मेरा पैर छूटते ही उसने बाइक के साथ-साथ दौड़ते हुए पीछे बैठी तृप्ति पर हमला बोल दिया।

मुझे लगा कि उसने तृप्ति पर वार किया है, लेकिन जैसे ही उसने बताया कि पीठ पर टंगे बैग से वह पीछे की तरफ खिंचा रही है तो मैं समझ गया कि बैग ही उसके मुंह में आ पाया है और तृप्ति सुरक्षित है। संभवत: बाइक की रफ्तार तेंदुए की दौड़ से तेज थी, इसलिए वह तृप्ति को नहीं दबोच पाया था। अब स्थिति यह थी कि आगे-आगे बाइक और पीछे-पीछे तेंदुआ। तेंदुआ तृप्ति को पीछे खींचता रहा।

मैं बाएं हाथ से तृप्ति को जकड़कर और दाएं हाथ से बाइक चलाता रहा। करीब 50 मीटर तक यही संघर्ष चला। मन में भगवान का नाम था तो तन में फुर्ती थी। अचानक जैसे भगवान ने हमारी प्रार्थना सुन ली। तेंदुए के खिंचाव से बैग का पट्‌टा टूट गया। बैग तेंदुए के मुंह में ही फंसा रह गया और हमारी बाइक की रफ्तार अपने-आप तेज हो गई।

हम समझ गए कि तेंदुआ पीछे छूट गया है। हमने पीछे देखे बिना बाइक दौड़ाना जारी रखा। हालांकि तेंदुआ करीब 200 मीटर तक पीछा करता रहा। उसके गुर्राने की आवाज आ रही थी। इसके बाद हम बस के लिए रुकना भी भूल गए और हमारी बाइक सीधे पांढुर्ली में स्कूल पर जाकर ही रुकी।

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