भास्कर एक्सप्लेनर: IPL ऑक्शन में टीमों ने ऑलराउंडर्स पर क्यों लुटाया खजाना? मॉरिस, मैक्सवेल और गौतम हाईएस्ट पेड क्यों बने?

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एक मिनट पहले

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साउथ अफ्रीकी क्रिकेटर क्रिस मॉरिस ऑलराउंडर हैं, पर बेन स्टोक्स जैसे करिश्माई नहीं। इसके बावजूद उन्हें IPL इतिहास की सबसे ज्यादा रकम देकर राजस्थान रॉयल्स ने खरीद लिया। 75 लाख रुपए बेस प्राइज वाले मॉरिस के लिए रॉयल्स ने 16.25 करोड़ रुपए दिए यानी 21 गुना ज्यादा। ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर मैक्सवेल को बेंगलुरु रॉयल चैलेंजर्स ने 14.25 करोड़ में खरीदा, मैक्सवेल का पिछला सीजन खास नहीं था। ऐसी ही कहानी ऑलराउंडर कृष्णप्पा गौतम की भी है।

सबसे बड़ी वजह: मुंबई के अलावा हर टीम को मैच फिनिशर की जरूरत
मॉरिस, मैक्सवेल, कृष्णप्पा गौतम और शिवम दुबे ऐसे ऑलराउंडर हैं, जो मैच फिनिश करने का माद्दा रखते हैं। मौजूदा फ्रेंचाइजियों में केवल मुंबई के पास पोलार्ड और पांड्या ब्रदर्स जैसे फिनिशर हैं। मुंबई के अलावा किसी भी टीम के पास मैच फिनिशर नहीं हैं। ऐसे में हर फ्रेंचाइजी ने इन खिलाड़ियों को खरीदने के लिए बेट लगाई। अब इन खिलाड़ियों के बारे में सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं…

क्रिस मॉरिस (राजस्थान रॉयल्स)
क्या रोल होगा?

राजस्थान रॉयल्स ने मॉरिस को ऑर्चर के बैकअप के तौर पर लिया है, लेकिन रिकॉर्ड्स और परफॉर्मेंस से उनका रोल बदलना तय है। वो फिनिशर की भूमिका निभाएंगे।

रोल में फिट हो सकेंगे?
आंकड़े बताते हैं कि मॉरिस अपना रोल बखूबी निभा सकते हैं। उन्होंने ओवरऑल 218 टी-20 मैच में 151.02 के स्ट्राइक रेट 1764 रन बनाए। 270 विकेट भी लिए हैं। वो ऑर्चर के साथ बॉलिंग की शुरुआत भी कर सकते हैं और आखिरी ओवरों में तेजी से रन बना सकते हैं। 2020 में उन्होंने एक मैच में RCB के लिए 313 के स्ट्राइक रेट से 8 बॉल में 25 रन बनाए थे।

इनकी जरूरत क्यों थी?
राजस्थान के पास जोफ्रा ऑर्चर के साथ गेंदबाजी की शुरुआत करने वाला विदेशी फास्ट बॉलर नहीं था। टॉम करन रिलीज कर दिए गए हैं। इसके बाद फास्ट बॉलर्स की कमी भी हो गई थी। लोअर मिडिल ऑर्डर में एक्सपीरियंस और मजबूत मनोबल वाला ऑलराउंडर भी चाहिए था। मॉरिस दोनों ही जरूरतें पूरी करते हैं।

ग्लेन मैक्सवेल (बेंगलुरु रॉयल चैलेंजर्स)
क्या रोल होगा?

बेंगलुरु मैक्सवेल का इस्तेमाल विराट और डिविलियर्स के बाद लोअर मिडिल ऑर्डर को मजबूत करने में करेगी। टीम को स्लॉग ओवर्स में भी बिग हिटर की जरूरत थी। बड़े टारगेट चेज करते वक्त उनका एक्सपीरियंस बेंगलुरु के काम आएगा।

रोल में फिट हो सकेंगे?
आंकड़े और उनका एक्सपीरियंस यही कहता है कि वे कारगर साबित होंगे। टी-20 में मैक्सवेल का स्ट्राइक रेट 152.05 का है। उन्होंने 331 छक्के और 529 चौके जमाए हैं। IPL में उन्होंने 82 मैचों में 1505 रन बनाए हैं। स्ट्राइक रेट 154.67 का है। इसके अलावा भारतीय पिचों पर उनकी ऑफ स्पिन भी काम आएगी। टी-20 में वो अब तक 108 विकेट ले चुके हैं।

इनकी जरूरत क्यों थी?
बेंगलुरु ने फिंच को रिलीज कर दिया है। फिंच टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज थे, पर ये जरूरत विराट और डिविलियर्स पूरी कर रहे हैं। ऐसे में टीम ने फिनिशर और बिग हिटर की पोजिशन के लिए मैक्सवेल पर बड़ा दांव लगाया। IPL के पिछले सीजन में तो मैक्सवेल कुछ खास नहीं कर सके, लेकिन इसके बाद बिग बैश लीग और ऑस्ट्रेलिया की तरफ से उन्होंने मैच विनिंग पारियां खेलीं और मौके पर विकेट भी चटकाए।

कृष्णप्पा गौतम (चेन्नई सुपर किंग्स)
क्या रोल होगा?

20 लाख बेस प्राइस वाले गौतम को 9.25 करोड़ यानी 46 गुना ज्यादा में चेन्नई सुपर किंग्स ने खरीदा है। सुपरकिंग्स उन्हें मोइन अली के बैकअप के तौर पर इस्तेमाल करेगी। हरभजन के जाने के बाद मोइन अली और गौतम ऑफ स्पिनर्स के तौर पर धोनी के लिए दो विकल्प होंगे। कृष्णप्पा भी मोइन अली की तरह तेजी से रन बना सकते हैं।

रोल में फिट हो सकेंगे?
ओवरऑल 62 टी-20 मैच खेल चुके गौतम 41 विकेट ले चुके हैं। उनका इकॉनमी 7.6 का है, जो इस फॉर्मेट में काफी किफायती माना जाता है। बैटिंग में उनका स्ट्राइक रेट 160 के करीब है। वो 2 अर्धशतक भी लगा चुके हैं। घरेलू टूर्नामेंट में लंबे-लंबे सिक्स उनकी यूएसपी बन चुके हैं। यानी वो इस रोल के लिए एकदम फिट हैं।

इनकी जरूरत क्यों थी?
गौतम को पिछले सीजन में पंजाब ने अपनी बेंच स्ट्रेंथ मजबूत करने के लिए खरीदा था। उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले, केवल 2 मैच में उन्हें खिलाया गया। रिकॉर्ड और एबिलिटी देखते हुए धोनी उनका ज्यादा बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं और धोनी इसी के लिए जाने भी जाते हैं। होम ग्राउंड पर धोनी मोइन अली और गौतम दोनों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, क्योंकि चेन्नई की पिच स्पिनर्स के लिए मददगार है और यहां टीम को 7 मैच खेलने हैं।

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