यूपी की राजनीति में अरविंद केजरीवाल की एंट्री, 28 फरवरी को किसान महापंचायत को संबोधित कर फूकेंगे चुनावी बिगुल

Delhi CM Arvind Kejriwal

Delhi CM Arvind Kejriwal

दिल्ली के बॉर्डर पर पिछले कई दिनों से किसान आंदोलन (Kisan Aandolan) जारी है. किसान लगातार नए कृषि कानून (Farm Bill 2020) को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. इस दौरान कई बार सरकार और किसानों के बीच बातचीत हुई, लेकिन उससे कोई भी हल नहीं निकला.

इसके साथ ही किसान आंदोलन (Kisan Aandolan) को तमाम राजनीतिक पार्टियों का समर्थन भी मिल रहा है. इसी बीच एक बार फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) भी किसानों के समर्थन में उतर गए हैं.

किसान महापंचायत का  आयोजन

दरअसल, उत्तर प्रदेश के मेरठ में किसानों के समर्थन में किसान महापंचायत (Kisan Mahapanchayat) आयोजित होने वाली है. इस किसान महापंचायत (Kisan Mahapanchayat) को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) संबोधित करेंगे. बताया जा रहा है कि यह किसान महापंचायत 28 फरवरी को होगी. बता दें कि आम आदमी पार्टी ने नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों का जोरदार समर्थन किया है. इस बीच केजरीवाल ने 2 बार दिल्ली के सिंधु बॉर्डर का दौरा भी किया, तो वहीं उन्होंने किसानों के प्रति अपना समर्थन भी व्यक्त किया है. जानकारी के लिए बता दें कि किसानों के विरोध प्रदर्शन का प्रमुख स्थल सिंघु बॉर्डर है. 

चुनावी माहौल की तैयारी

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में साल 2022 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसके लिए आम आदमी पार्टी भी मैदान में आने के लिए तैयारी कर रही है. उसी के लिए चुनावी माहौल भी बनाया जा रहा है. सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना भी साधा है, उन्होंने कहा कि देश के किसान 80 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं और अब तक 200 किसान इस आंदोलन की भेंट चढ़ चुके हैं. मगर अब भी किसानों की मांग पूरी नहीं हुई है.

उन्‍होंने आगे कहा कि जब यह बिल संसद में आया था, तब भी उन्होंने इसका विरोध किया था. इतना ही नहीं, एक तरफ पेट्रोल 100 रुपए पार हो गया, तो वहीं दूसरी तरफ गैस के दाम भी 50 रुपए बढ़ गए हैं. अगर यह कानून हिंदुस्तान में लागू हुआ, तो हर सामान की कीमत बढ़ जाएगी.

इस तरह महंगाई भी काफी बढ़ जाएगी, जो कि देश की जनता के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि इस कानून में एमएसपी की गारंटी कहीं नहीं है. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग बहुत खतरनाक कानून है, जिसमें किसानों की जमीनें चंद पूंजीपति लेंगे.

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