जापान में आज से शुरू होगा टीकाकरण: 62% लोग जल्दबाजी में टीका लगवाना नहीं चाहते, पहले के वैक्सीन अभियान के खराब अनुभवों से डरे

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टोक्यो4 घंटे पहले

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2011 में मैनिजाइटिस और निमोनिया के टीके पर भी रोक लगा दी गई थी। यह टीका दिए जाने के बाद 4 बच्चों की मौत हो गई थी। - Dainik Bhaskar

2011 में मैनिजाइटिस और निमोनिया के टीके पर भी रोक लगा दी गई थी। यह टीका दिए जाने के बाद 4 बच्चों की मौत हो गई थी।

जापान बुधवार को कोरोनोवायरस के खिलाफ टीकाकरण शुरू करने जा रहा है। ऐसा करने वाला वह आखिरी विकसित देश है। इस देरी की वजह से उसकी आलोचना भी हो रही है। जापान सरकार ने रविवार को अमेरिका निर्मित फाइजर वैक्सीन को मंजूरी दी। इसके 48 घंटे बाद वैक्सीन की पहली खेप जापान पहुंच गई है। सबसे पहले 37 लाख हेल्थ केयर वर्कर्स और अन्य फ्रंट लाइन वर्कर्स को टीका लगेगा।

हालांकि जापान में टीकाकरण का सफर काफी मुश्किलों भरा है। आशी न्यूजपेपर के सर्वे के मुताबिक जापान में 62% आबादी टीकाकरण से पहले वेट एंड वॉच की स्थिति में है। क्योडो न्यूज के सर्वे में भी जापान में टीकों को लेकर लोगों में संदेह हैं। सर्वे में सिर्फ 63.1% लोगों ने टीका लगवाने की जल्द इच्छा जाहिर की।

वहीं, 27.4% लोगों ने कहा कि वे वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते हैं। 40-60 साल की महिलाएं टीका लगवाने के लिए बिल्कुल भी इच्छुक नहीं है। लोगों का मानना है कि कोरोना से निपटने के लिए वैक्सीन बहुत जल्दी में लॉन्च हुआ है। इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त परीक्षण नहीं किए गए हैं कि वे सुरक्षित हैं और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है।

माइनस 70 डिग्री में वैक्सीन रखने की व्यवस्था न होना बड़ी चुनौती
हालांकि, सफल टीकाकरण की राह में कई बाधाएं हैं। सबसे बड़ी बाधा यह है कि देशभर के मेडिकल केंद्रों में वैक्सीन पहुंचाना और इनका रखरखाव करना है। क्योंकि ज्यादातर सेंटर में वैक्सीन के लिए जरूरी माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तापमान की व्यवस्था नहीं है।

दूरदराज इलाकों में टीका लगाने के लिए पेशेवर चिकित्सकों की कमी है। स्वास्थ्य अधिकारी इस काम के लिए 11 हजार चिकित्सकों को खोज रहे हैं, जो अपने दैनिक दायित्वों के अलावा टीकाकरण के काम को आगे बढ़ा सके। एक और जटिल समस्या यह है कि फाइजर वैक्सीन देने के लिए डिजाइन की गई सिरिंज की कमी है। इससे लाखों डोज बर्बाद हो सकती है।

जापान में कई बार टीकाकरण अभियान को वापस लिया गया है
1993 में कैसे खसरा, कंठमाला और रूबेला का संयुक्त टीका वापस ले लिया गया था, क्योंकि उसकी वजह से मैनिजाइटिस बीमारी हो रही थी। जबकि 2011 में मैनिजाइटिस और निमोनिया के टीके पर भी रोक लगा दी गई थी। यह टीका दिए जाने के बाद 4 बच्चों की मौत हो गई थी। हाल ही में, स्वास्थ्य मंत्रालय ने मानव पेपिलोमा वायरस की वैक्सीन को बढ़ावा देना बंद कर दिया है। कुछ लोगों को सर्वाइकल कैंसर का शिकार होना पड़ा है।

जापान में अच्छी बात यह है कि कोरोना के नए मामले तेजी से घट रहे हैं। सोमवार को कुल 965 नए मामले आए। 16 नवंबर के बाद पहली बार संक्रमित की संख्या 1 हजार से कम रही है। देश में कोरोना के 3.9 लाख मामले आ चुके हैं। 7056 लोगों की मौत हो चुकी है।

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