किसान आंदोलन का 84वां दिन: सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनकारियों में शामिल शख्स पुलिस की गाड़ी लेकर भागा, SHO को तलवार मारी

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नई दिल्ली32 मिनट पहले

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नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान 84 दिन से दिल्ली के सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। - Dainik Bhaskar

नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान 84 दिन से दिल्ली के सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को बुधवार को 84 दिन हो गए हैं। किसान दिल्ली की सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच, सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन में शामिल एक शख्स ने मंगलवार रात पुलिस अधिकारी पर तलवार से हमला कर दिया। इसके बाद वह पुलिस अधिकारी की गाड़ी लेकर भाग गया। घायल SHO को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस ने बुधवार को बताया कि आरोपी का नाम हरप्रीत सिंह है। उसने रात करीब 8 बजे सिंघु बॉर्डर पर यह वारदात की। पुलिस के जवानों ने PCR वैन ने उसका पीछा किया। भागने के चक्कर में हरप्रीत मुकरबा चौक के पास फुटपाथ में गाड़ी घुसा दी। इसके बाद वह एक शख्स से बाइक छीनकर फरार हो गया। पुलिस ने करीब 8.30 बजे उसे पकड़ लिया।

सूत्रों का कहना है कि आरोपी मेंटली अनस्टेबल है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। एक सीनियर पुलिस ऑफिस ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में कानूनी कार्रवाई चल रही है।

किसान आंदोलन के राजनीतिक नुकसान से भाजपा चिंतित
किसान आंदोलन के राजनीतिक रूप लेने से भाजपा चिंतित है। मसले का कोई हल जल्द ही नहीं निकाला गया तो जाट बहुल इलाकों में पार्टी को नुकसान हो सकता है। खासकर पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में पार्टी के स्थिति कमजोर हो सकती है।

इन क्षेत्रों के सांसदों और विधायकों की फीडबैक के आधार पर पार्टी अब अपनी रणनीति बनाने में जुट गई है। शीर्ष नेतृत्व ने इसके लिए इन नेताओं को अपने-अपने क्षेत्र खासतौर पर जाट किसानों से लगातार संपर्क में रहने को कहा है।

जाट वोटबैंक पर पकड़ बनाए रखने के लिए रणनीति बनाई
इसे लेकर पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में मंगलवार को एक बैठक हुई। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और महासचिव (संगठन) बीएल संतोष शामिल हुए। इन नेताओं ने विधायकों और स्थानीय नेताओं से आग्रह किया कि वे इन क्षेत्रों में स्थानीय खापों, पंचायतों और सामुदायिक समूहों के साथ संपर्क करें ताकि पार्टी और सरकार की स्थिति को समझाया जा सके।

किसान आंदोलन के जारी रहने और पार्टी के जमीनी कैडर से मिले फीडबैक के बाद पार्टी नेतृत्व को यह बैठक करने के लिए मजबूर होना पड़ा। किसान आंदोलन में जाट समुदाय की बढ़ती भागीदारी भाजपा के लिए चिंता का विषय बन गया है । पश्चिमी उत्तरप्रदेश के जाटों ने 2014 से ही प्रधानमंत्री मोदी के पक्ष में एकतरफा मतदान किया है।

भाजपा को डर है कि कहीं उसके जाट वोट बैंक में सेंध ना लग जाए। अब विपक्षी पार्टियां खासकर कांग्रेस जाटों को लुभाने का प्रयास कर रही है। प्रियंका गांधी लगातार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान पंचायतों में शामिल हो रहीं हैं।

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