7 जिंदगियां बचाने वाली युवतियों की कहानी: सीधी में हादसे का शिकार हुई बस के पिछले गेट से गिरे 7 लोगों को तैरकर बचाया, अफसोस कि एक बच्चा बह गया

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  • Seven Brothers And Sisters Who Fell From The Rear Gate Of The Bus Floated, A Child Was Still Swept Away In Front Of My Eyes. मंगलवार तड़के सीधी से सतना जा रही बस के बाणसागर की नहर में गिरने से 45 जान चली गई। शव अभी भी खोजे जा रहे हैं। इस हादसे में सात यात्रियों को समय रहते बचा लिया गया। रीयल हीरो शिवरानी और आशा बंसल ने बताई हादसे की पूरी कहानी। 

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सीधी/रीवा25 मिनट पहले

शिवारानी लोनिया (बाएं) अपने भाई के साथ मौके पर पहुंची थीं। उनके पीछे-पीछे आशा बंसल (दाएं) ने भी दौड़ लगा दी।

मध्यप्रदेश के सीधी में मंगलवार को हुए बस हादसे में लोगों को बचाने के लिए सबसे पहले सरदा गांव की शिवारानी लोनिया और आशा बंसल मौके पर पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि वे खुद की जिंदगी की परवाह किए बगैर बाणसागर नहर में कूद पड़ीं और बस के पिछले दरवाजे से निकले सात लोगों को बचा लिया। इनमें एक बच्चा भी शामिल है। बस का ड्राइवर खुद ही तैरकर बाहर आ गया।

हो सकता है और भी लोग बह गए हों: शिवारानी
शिवारानी की उम्र करीब 18 साल है। उन्होंने बताया, ‘सुबह करीब सात, साढ़े सात का वक्त रहा होगा। मैं घर के बाहर बैठी थी। बस नहर के किनारे से जा रही थी। देखते ही देखते अचानक वह बहकी और नहर में गिर गई। मैं चीखती हुई भाई के साथ दौड़ पड़ी। बस के पिछले दरवाजे से कुछ लोग बाहर निकलते दिखे। वे निकल तो आ गए, लेकिन बहने लगे। मैंने बिना मौका गंवाए छलांग लगा दी और लोगों को सहारा देकर किनारे तक ले आई। बस एक बच्चे को नहीं बचा पाने का अफसोस है। वह मेरी आंखों के सामने से बह गया।’

ड्राइवर ने बस को कंट्रोल करने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा: आशा
आशा ने बताया, ‘बस बहकी तो उसका पिछला हिस्सा नहर में लटक गया। ऐसा लगा कि ड्राइवर ने ब्रेक लगाकर संभालने की कोशिश की, लेकिन ढाल ज्यादा होने के कारण वह नाकाम रहा। मैं चीखती हुई भागी। थोड़ी देर में पूरा गांव इकट्ठा हो गया। फोन किया तो पुलिस और प्रशासन के लोग भी आधा घंटा में पहुंच गए। तब डूबे हुए लोगों की तलाश शुरू हुई।’

मौत के मुंह से लौटी छात्रा का दर्द: छोटे भाई को साथ ले आई थी, मैं बच गई, वह बह गया
बस हादसे में सीधी जिले के गांव पोस्ट चौपाल की रहने वाली 22 साल की वीरा प्रजापति ने अपने भाई को खो दिया। वे कहती हैं- बस में दो की सीट पर तीन-तीन लोग बैठे थे। बहुत से स्टूडेंट थे। ड्राइवर ने नहर की पुलिया से पहले ही गाड़ी मोड़ ली और नए रास्ते से ले जाने लगा। रफ्तार बहुत तेज थी। कुछ लोगों ने ड्राइवर से बस धीरे चलाने को कहा, लेकिन उसने स्पीड कम नहीं की। कुछ ही दूरी पर अचानक झटका लगा। बस में पानी भरने लगा। मैंने अपने भाई का हाथ पकड़ लिया। मैं कैसे बाहर निकली मुझे पता नहीं। मेरा भाई बह गया। पता नहीं वह कहां चला गया।

सबसे पीछे की सीट पर बैठी थी, बहने लगी तो रस्सी डालकर बचाया
सरई की नर्सिंग स्टूडेंट अर्चना जायसवाल भी एग्जाम देने सरई से सतना जा रही थीं। उन्होंने कहा- मैं सबसे पीछे की लंबी सीट पर गेट के पास बैठी थी। हादसा कैसे हुआ, यह तो पता नहीं। पर मैं अचानक बहकर जाने लगी। काफी दूर तक जा चुकी थी। फिर किसी ने रस्सी के सहारे बचाया और बाहर लेकर आए। (इन छात्राओं की पूरी आपबीती यहां पढ़ें)

22 फीट गहरी नहर में गिरी बस
यह हादसा सीधी जिले के सरदा गांव में मंगलवार सुबह 7:30 बजे हुआ। 54 यात्रियों के साथ सतना जा रही बस 22 फीट गहरी बाणसागर नहर में गिर गई। शाम तक 47 शव निकाले जा चुके थे। इस बस को सीधी से चुरहट, रामपुर नैकिन, बधबार और गोविंदगढ़ होते हुए सतना पहुंचना था। चुरहट तक बस आई, लेकिन उसके बाद रामपुर नैकिन से स्टूडेंट्स के कहने पर ड्राइवर ने रूट बदल लिया। इन स्टूडेंट्स का एग्जाम था, इसलिए उन्हें वक्त पर सतना पहुंचना था। सरदा गांव से जो रास्ता सतना की ओर जाता है, उसके साथ-साथ नहर चलती है। यहां एक जगह आकर रास्ता संकरा हो जाता है। यहीं बस बेकाबू होकर नहर में गिरी।

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