बंगाल में अब फूड पॉलिटिक्स: पांच रुपए में गरीबों को दाल-चावल, सब्जी और एक अंडा देंगी ममता; काेलकाता में शुरू की ‘मां की रसोई’ योजना

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कोलकाता3 मिनट पहले

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ममता बनर्जी हाल ही में बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन में एक आदिवासी गांव गई थीं। यहां उन्होंने एक आदिवासी महिला की दुकान पर खुद ही सब्जी बनाने लगीं। - Dainik Bhaskar

ममता बनर्जी हाल ही में बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन में एक आदिवासी गांव गई थीं। यहां उन्होंने एक आदिवासी महिला की दुकान पर खुद ही सब्जी बनाने लगीं।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले खूनी संघर्ष, दल-बदल, जुबानी हमलों के बाद अब फूड (भोजन) पॉलिटिक्स भी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को ‘मां की रसोई’ योजना शुरू की। इसके तहत सिर्फ 5 रुपए में गरीबों को दोपहर में भरपेट भोजन दिया जाएगा। मेन्यू में दाल-चावल और सब्जी के साथ एक अंडा शामिल है।

स्कीम का नाम तृणमूल कांग्रेस के नारे मां, माटी और मानुष से लिया गया है। ममता ने कहा कि राज्य सरकार प्रति प्लेट 15 रुपए की सब्सिडी वहन करेगी। उन्होंने कहा कि स्वयं-सहायता समूह हर दिन दोपहर एक बजे से तीन बजे के बीच रसोइयों का संचालन करेंगे। धीरे-धीरे राज्य में हर जगह ऐसे रसोई घर बनाए जाएंगे। तमिलनाडु में भी इसी तरह अम्मा कैंटीन के नाम से तब की CM जयललिता ने एक योजना शुरू की थी।

शाह और नड्‌डा ने दलित के घर खाया था खाना
इससे पहले भाजपा के चुनावी अभियान के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा और गृह मंत्री अमित शाह गरीबों के घर भोजन करते दिख चुके हैं। 5 नवंबर को बांकुड़ा जिले के चतुर्थी गांव में अनुसूचित जाति के करीब 350 लोगों के बीच शाह ने एक दलित परिवार के यहां न केवल दिन का भोजन किया बल्कि परिवार के साथ फोटो भी खिंचवाई थी। बंगाल के दो दिन के अपने दौरे के समय शाह ने उत्तर 24 परगना में एक मटुआ परिवार के साथ भोजन भी किया था।

जातियों को जोड़ने की जुगत में दोनों दल
बंगाल में SC-ST की आबादी राज्य की कुल आबादी का 28% है। वहीं, मटुआ कम्युनिटी की आबादी 17.4% है। ऐसे में दोनों दल इन जातियों को जोड़ने की जुगत में जुट गए हैं। बांकुड़ा, पश्चिम मिदनापुर, झारग्राम, पुरुलिया और वीरभूम में एससी-एसटी के प्रभाव वाले क्षेत्र हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव नतीजों को देखें तो यहां की 56 में से 35 सीटों पर भाजपा को बढ़त थी।

मटुआ समुदाय का 50 विधानसभा सीटों पर प्रभाव
मटु़आ एक प्रभावशाली हिंदू दलित जाति है। इसका करीब 50 विधानसभा सीटों पर असर है। पश्चिम बंगाल की 10 करोड़ की आबादी में इसका हिस्सा 17.4 प्रतिशत है। यह जाति मूल रूप से पूर्वी पाकिस्तान की रहने वाली थी, जो देश के बंटवारे के समय यहां आकर बस गई थी।

राज्य की 294 में से 85 सीटें SC-ST के लिए रिजर्व
बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से एससी के लिए कुल 69 सीटें रिजर्व हैं। वहीं एसटी के लिए 16 सीटें। ऐसे में कुल 85 सीटों पर SC-ST समूह का बड़ा वर्ग अपना दखल रखता है। लोकसभा चुनाव में 12 सीटें रिजर्व हैं। इनमें से भाजपा ने जहां सात सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, ममता की पार्टी के पांच सांसद विजयी हुए थे।

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