एनडीए की टूट में छिपा है भाजपा की जीत का राज, लोजपा के चिराग से चमकेगा भगवा रंग

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22 मिनट पहले

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एनडीए में भाजपा और जदयू के साथ लोजपा भी है, लेकिन जदयू लोजपा को सीट बंटवारे में हिस्सेदार ही नहीं मान रही है।

  • चिराग एनडीए से अलग होते हैं तो चिराग जदयू के उन तमाम सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे
  • चिराग अगर जदयू को नुकसान पहुंचाने में कामयाब होते हैं तो भाजपा को इसका फायदा मिलेगा

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर रस्साकसी जारी है। सभी दल अपने लिए अधिक से अधिक सीट पाने की जुगत में लगे हैं। लगातार चिराग पासवान के तल्ख तेवर से यह तय माना जा रहा है कि वह एनडीए से अलग हो सकते हैं। ऐसे में चिराग जदयू के प्रत्याशियों के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारेंगे। माना जा रहा है कि चिराग जदयू को नुकसान पहुंचाने में कामयाब होते हैं तो भाजपा को इसका फायदा मिलेगा और भाजपा बिहार एनडीए में बड़े भाई की भूमिका में आ सकती है।

बिहार के चुनावी महासमर में उतरने की तैयारी कर रहे महागठबंधन की नैय्या, सीटों के तालमेल को लेकर हिचकोले खा रही है। रालोसपा ने महागठबंधन से अलग होने के संकेत दे दिए हैं तो कांग्रेस इन स्थितियों को लेकर चिंता जाहिर कर रही है। लेकिन, ऐसा नहीं कि ये हालात बस महागठबंधन में है।

बिहार की सत्ता में बैठी पार्टियों के बीच भी सीटों की स्थिति साफ होने के बजाय उलझती दिख रही है। एनडीए में भाजपा और जदयू के साथ लोजपा भी है, लेकिन जदयू लोजपा को सीट बंटवारे में हिस्सेदार ही नहीं मान रही है। दूसरी तरफ भाजपा का स्टैंड भी कुछ ऐसा ही है। भाजपा जदयू के साथ सीट बंटवारे पर बात करने को तो तैयार है, लेकिन जीतनराम मांझी की पार्टी हम (जिसके साथ हाल ही में जदयू का गठजोड़ हुआ है) को भाजपा हिस्सेदार मानने को तैयार नहीं।

असल में ये पूरा जोड़तोड़ सीट बंटवारे में ज्यादा से ज्यादा सीटें पाने की कोशिश का नतीजा है, जिसकी वजह से एनडीए का हाल महागठबंधन जैसा होता दिख रहा है। सूत्रों की माने तो भाजपा और जदयू के बीच इस खींचतान की शुरुआत तब हुई जब जदयू की तरफ से सीट बंटवारे में आमने-सामने सिर्फ दो पार्टियों के बीच बातचीत का फार्मूला रखा गया। असल में जदयू ने बीजेपी से कहा कि दोनों पार्टियां अपनी-अपनी सीटें आपस में बांट लें। भाजपा अपने हिस्से की सीटों में से लोजपा को भागीदारी दे और जदयू जीतनराम मांझी की पार्टी हम को अपने हिस्से से सीटें देगी।

जदयू का फार्मूला भाजपा को बहुत रास नहीं आया

जदयू का ये फार्मूला भाजपा को बहुत रास नहीं आया और लोजपा ने तो इस फार्मूले के खिलाफ आक्रामक तेवर अपना लिए। लोजपा नेता चिराग पासवान ने न सिर्फ नीतीश कुमार के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया, बल्कि 143 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का बयान देना भी शुरू कर दिया। अपने इस बयान के जरिये लोजपा ने ये जताया कि अगर जदयू उसे अपना भागीदार नहीं मानती तो वो उन सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी जहां जदयू मैदान में है।

हालांकि, ये सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या लोजपा इतनी तैयार है कि वो 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दे। वैसे लोजपा के लिए विधानसभा चुनाव में खोने को कुछ नहीं, क्योंकि 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू और राजद के गठजोड़ ने लोजपा को बुरी हार का सामना कराया था और महज 2 सीटों पर ही वो जीत कर आ सकी थी। ऐसे में इस बार का चुनाव उसके लिए अस्तित्व का सवाल बन चुका है। भाजपा की तरफ से अब भी इसे लेकर कोशिशें चल रही हैं कि लोजपा एनडीए के साथ चुनाव लड़े, लेकिन जदयू कि जिद ने उसे मुश्किल में डाल दिया है।

ये पूरी लड़ाई, जिसमें लोजपा और जदयू आमने-सामने दिख रही है वो असल में बीजेपी-जदयू की भी लड़ाई है। दूध की जली बीजेपी अब छांछ भी फूंक-फूंक कर पीना चाहती है। क्योंकि 2013 में भाजपा छोड़कर जाने वाले जदयू और 2017 में महागठबंधन को छोड़कर फिर से भाजपा के साथ आनेवाले जदयू को लेकर बीजेपी अब कोई रिस्क नहीं लेना चाहती।

बीजेपी के लिए सीटों का बंटवारा बिहार की सियासत में केवल बड़े भाई और छोटे भाई का किस्सा नहीं बल्कि इससे कहीं बढ़कर है। भाजपा के लिए जदयू के हिस्से ज्यादा सीटें जाने का मतलब है जदयू को जीत में ज्यादा हिस्सेदारी मिलना और फिर बिहार में संख्याबल के हिसाब से जदयू का भाजपा से ज्यादा ताकतवर होना। भाजपा से जदयू के ज्यादा ताकतवर होने पर जदयू के एक बार फिर दूसरी तरफ जाने की संभावना बनी रहेगी और ये खतरा बीजेपी किसी हाल में नहीं उठाना चाहती।

भाजपा के केंद्रीय नेता खुलकर तो नहीं, लेकिन ये कह रहे हैं कि इस बार बीजेपी ट्रिपल डिजिट से पीछे जाने को तैयार नहीं। मतलब 243 में से कम से कम 100 सीटें भाजपा लेगी। इस आंकड़े को अगर लोजपा नेता चिराग पासवान के बयान के लिहाज से देखें तो फिट बैठता है क्योंकि चिराग पासवान ने भी कहा कि वो 143 सीटों पर अपनी तैयारी कर रहे हैं, मतलब बाकी बची 100 सीटें जिसपर भाजपा चुनाव लड़ेगी उस पर वो अपने प्रत्याशी नहीं उतारेंगे।

चिराग पासवान के इस बयान को गंभीरता से लिया जाए या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि आनेवाले दिनों में जदयू अपना रूख बदलती है या नहीं। क्योंकि अगर लोजपा को एनडीए में सही हिस्सेदारी नहीं मिली तो वह थर्ड फ्रंट के रास्ते पर जा सकती है। जहां से उसे जनाधिकार पार्टी के पप्पू यादव ने पहले ही बुलावा भेज दिया है। पिछले दिनों चिराग पासवान ने पप्पू यादव से मुलाकात भी थी और करीब four घंटे दोनों नेताओं के बीच ये बातचीत हुई। कुल मिलाकर एनडीए में चुनावी शतरंज बिछ चुका है और हर कोई अपनी चाल चल रहा है, लेकिन इसमें ज्यादा सेफ बीजेपी ही दिख रही है, क्योंकि लोजपा साथ लड़ती है तब भी और अगर अलग लड़ती है तब भी वो हर हाल में बीजेपी के साथ है। जिसका फायदा उसे मिलना तय है।

कंटेंट: शालिनी सिंह

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